आज देश ने देखा कि कैसे 24 घंटे का अल्टिमेटम देकर पंजाब पुलिस के इकबाल की धज्जियां उड़ाई गईं। सैकड़ों की भीड़ ने पुलिस पर पत्थर-लाठी-डंडे और तलवारों से हमला बोला और अमृतसर के अजनाला थाने पर घंटों कब्जा किये रखा। अहसास दिला दिया कि पंजाब में कानून उनके ठेंगे पर है।
गजब तो ये है कि थाने पर हमला बोलने वाले खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों ने पंजाब पुलिस को घुटनों पर लाकर अपनी मांगें मंगवा लीं। और पंजाब के सीएम ये कहते दिखे कि पंजाब में कानून व्यवस्था दुरुस्त है। मान का ये बयान चौंका रहा है और सवाल उठा रहा है कि क्या पंजाब में सियासी फायदे के लिये खालिस्तान के मुद्दे को हवा दी जा रही है?
अमृतसर के अजनाला थाने पर खालिस्तान समर्थक भीड़ के हमले की इन तस्वीरों पर देश सकते में है। इन्हें देखकर 90 के दशक की वो तस्वीरें अचानक आंखों के सामने घूमने लगी हैं। जब पंजाब से हर दिन खून-खराबे की खबरें आती थीं।
पाकिस्तान की सरहद से लगा ये सूबा 90 के दशक के उस खौफनाक दौर से बेहद मुश्किल से बाहर निकला। जब खालिस्तान का नाम उछालकर मासूमों का खून बहाया गया लेकिन पंजाब के अजनाला में कानून को हाथ में लेकर इस भीड़ ने जिस तरह थाने पर हमला बोला वो चौंका रहा है। खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए वो सवाल उठा रहा है कि पंजाब में खालिस्तान की आग को कौन शह दे रहा है?
