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I-PAC vs ED: 'CM ममता ने जो किया वह गैरकानूनी, हम ऐतिहासिक आदेश चाहते हैं', SC में SG तुषार मेहता ने दीं क्या-क्या दलीलें?

SC on ED Raid in I PAC office: IPAC रेड मामले में ED की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी गैरकानूनी तरीके से छापे की जगह पहुंचे, दस्तावेज ले गए और ED अधिकारियों के फोन जब्त किए, जिससे जांच प्रभावित हुई। केंद्र ने जांच में बाधा डालने वाले अधिकारियों के निलंबन की मांग की है।

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I PAC दफ्तर पर ईडी रेड पर हुई दखल पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई।(फोटो सोर्स: istock)

Photo : iStock

SC on ED Raid in I PAC office: कोलकाता में हुई IPAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलीलें पेश कीं और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा राज्य प्रशासन पर गंभी आरोप लगाए।

मामला कानून से शासन से जुड़ा हुआ: तुषार मेहता

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ED के अधिकारी इस मामले में भारत के नागरिक के रूप में याचिकाकर्ता बने हैं, क्योंकि वे छापेमारी के दौरान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने याचिका की मेंटेनेबिलिटी को सही ठहराते हुए कहा कि यह मामला केवल एजेंसी पर हमला नहीं, बल्कि कानून के शासन से जुड़ा है।

‘छापे की जगह पर अवैध रूप से पहुंचीं ममता बनर्जी’

तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ED ने एक निजी कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों के परिसरों पर छापा मारा था। इस दौरान स्थानीय पुलिस को पहले से सूचना दी गई थी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर और डीसीपी के साथ गैरकानूनी तरीके से छापे की जगह पर पहुंचीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने वहां से जांच से जुड़े अहम दस्तावेज अपने साथ ले लिए, साथ ही ED अधिकारियों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए। सॉलिसिटर जनरल ने इसे जांच में सीधी दखलअंदाजी और चोरी करार दिया।

तुषार मेहता ने आगे आरोप लगाया कि ये पहली बार नहीं जब जांच एजेंसी के काम में बाधा डाली जा रही है। हम सुप्रीम कोर्ट से चाहते है कि ऐसा आदेश की ऐसा घटना दोहराई न जाए।

केंद्रीय एजेंसियों के मनोबल पर असर

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों का नेताओं के साथ धरने पर बैठना और छापेमारी में हस्तक्षेप करना न केवल केंद्रीय एजेंसियों के मनोबल को तोड़ता है, बल्कि निष्पक्ष जांच को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले CBI के जॉइंट डायरेक्टर के आवास का घेराव और तोड़फोड़ की घटना भी सामने आ चुकी है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

‘ED सिर्फ संस्था नहीं, पीड़ितों की आवाज’: SG

SG ने अदालत में दलील दी कि ED केवल एक जांच एजेंसी नहीं है, बल्कि किसी भी आर्थिक अपराध के मामले में पीड़ितों की इच्छाओं और हितों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को कमजोर करना पूरे न्यायिक तंत्र को प्रभावित करता है।

आखिर क्या छिपा रही ममता सरकार: तुषार मेहता

ED की ओर से SG ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिस तरह से पुलिस अधिकारियों के साथ जबरन रेड की जगह में घुसीं, वह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या छुपाया जा रहा था कि मुख्यमंत्री को खुद पुलिस के साथ गैरकानूनी तरीके से परिसर में घुसना पड़ा?” SG ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब जांच एजेंसियों के काम में इस तरह की बाधा डाली गई हो।

‘जांच में बाधा न हो, इसके लिए सख्त आदेश जरूरी’

SG ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि ऐसा स्पष्ट आदेश दिया जाए जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और जांच एजेंसियां बिना दबाव अपना काम कर सकें।

ED ने PMLA का दिया हवाला

SG ने कहा कि PMLA की धारा 17 ED को तलाशी और जब्ती का अधिकार देती है। उन्होंने बताया कि ED अधिकारियों ने रेड के दौरान अपना आधिकारिक पहचान पत्र भी दिखाया था, इसके बावजूद जांच से जुड़े दस्तावेज कथित तौर पर जबरन ले लिए गए। SG ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और अन्य लोग खुलेआम यह स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने दस्तावेज उठाए, जिसे उन्होंने सीधी चोरी करार दिया।

कपिल सिब्बल और सिंघवी ने बचाव में क्या-क्या कहा?

बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ऊपर जो आरोप लगाया गया है कि वो सारे डिवाइस लेकर गई यह गलत है। ममता केवल अपना लैपटॉप और आई फोन ही ले गई थीं। वहीं, पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर की तरफ से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने ED की मंशा पर सवाल खड़े किए।

सिंघवी ने कहा, "ईडी ने एक आकस्मिक ईमेल द्वारा सूचित किया कि ईडी ने 6:30 बजे से तलाशी शुरू की, जबकि ईमेल 11:30 बजे भेजा गया। 11:30 बजे भेजा गया ईमेल, तलाशी शुरू होने के पांच घंटे बाद, ED की मंशा को कवर करने के लिए किया गया, जिसका मकसद टीएमसी के चुनावी दस्तावेजों को कब्जे में लेने का था।"

मामले में मुख्यमंत्री स्वयं आरोपी: एस.वी. राजू

ED के अधिकारियों द्वारा दायर दूसरी याचिका पर बहस करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री स्वयं आरोपी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने डीजीपी की मौजूदगी में व्यक्तिगत रूप से चोरी की, जबकि डीजीपी की भूमिका इसमें सहयोगी की थी।

एएसजी ने कहा कि ED के काम में बाधा डालने के अपराध के मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस की भूमिका सहयोगी की है। उन्होंने यह भी कहा कि न तो FIR दर्ज की गई और अगर की भी जाती, तो उसी पुलिस द्वारा जांच की जाती जिस पर आरोप है। एएसजी एस.वी. राजू ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में CBI से जांच कराने का आदेश देने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि वह इस पर पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करेगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी करते हुए कहा जो कुछ हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट में हुआ, वह बेहद चिंताजनक है।”

अधिकारियों को निलंबित करने की मांग

वहीं, तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि वह गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को निर्देश दे कि जांच में बाधा डालने वाले राज्य के अधिकारियों को निलंबित किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा आदेश जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और यह एक नजीर (precedent) बने।

‘जांच को बाधित करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश जरूरी’

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा कि ED को छापे से पहले सूचना मिली थी कि वहां कुछ अहम दस्तावेज मौजूद हैं, जो जांच के दायरे में आते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा छापे की जगह पर पहुंचना और दस्तावेज ले जाना सीधे तौर पर जांच को प्रभावित करने वाला कदम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोर्ट का सख्त आदेश न सिर्फ इस मामले में बल्कि भविष्य में भी जांच एजेंसियों के कामकाज की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

ईडी ने की डीजीपी को निलंबित करने की मांग

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार को निलंबित करने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक नया आवेदन दायर किया है। अपने आवेदन में, ईडी ने पश्चिम बंगाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की है, जिसमें एजेंसी की जांच के दौरान कदाचार और असहयोग का आरोप लगाया गया है। केंद्रीय एजेंसी ने सर्वोच्च न्यायालय से कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) और केंद्रीय गृह मंत्रालय को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया है।

ईडी ने CM ममता पर क्या लगाए आरोप?

ईडी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने दोपहर करीब 12:15 बजे घटनास्थल से जाने से पहले सभी डिजिटल उपकरण और तीन आपत्तिजनक दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए, जिसके बाद एक घटना रिपोर्ट तैयार की गई।

ईडी ने बताया कि ये दस्तावेज पुलिस महानिदेशक और पुलिस प्रमुख को दिखाए गए थे, फिर भी आपत्तिजनक सामग्री को ले लिया गया और बाद में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। ईडी ने न्यायालय से मामले पर समग्र रूप से विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इन घटनाओं के बावजूद आई-पीएसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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