तटीय सुरक्षा का नया प्रहरी! टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट से लैस INS Mahe

भारतीय नौसेना ने सोमवार को आईएनएस माहे को अपने बेड़े में शामिल कर लिया। यह माहे श्रेणी का पहला पनडुब्बी रोधी उथले पानी में युद्ध करने वाला स्वदेशी जहाज है। इसके शामिल होने से तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और पनडुब्बी-रोधी क्षमता में बड़ा इजाफा माना जा रहा है। इस जलावतरण में पहली बार सेना प्रमुख भी मौजूद रहे, जो तीनों सेनाओं के बढ़ते तालमेल का संकेत है।

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Nov 24 2025, 18:43 IST
पहला माहे-श्रेणी युद्धपोतImage Credit : Indian Navy01 / 07

पहला माहे-श्रेणी युद्धपोत

आईएनएस माहे उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों को पहचानने और उनसे मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया पहला जहाज है।

80% स्वदेशी सामग्रीImage Credit : Indian Navy02 / 07

80% स्वदेशी सामग्री

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह पोत 80% से अधिक स्वदेशी घटकों से बनाया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बड़ी मिसाल है।

हथियारों से लैसImage Credit : Indian Navy03 / 07

हथियारों से लैस

जहाज टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट जैसे आधुनिक हथियारों से लैस है, जिससे यह तटीय रक्षापंक्ति का मजबूत हिस्सा बनेगा।

तटीय सुरक्षा में बढ़तImage Credit : Indian Navy04 / 07

तटीय सुरक्षा में बढ़त

आईएनएस माहे बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और वायु परिसंपत्तियों के साथ मिलकर भारत की तटीय समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

सेना प्रमुख की मौजूदगीImage Credit : Indian Navy05 / 07

सेना प्रमुख की मौजूदगी

पहली बार नौसेना के किसी जहाज के जलावतरण में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जो तीनों सेनाओं के बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।

नौसेना की उभरती क्षमताImage Credit : Indian Navy06 / 07

नौसेना की उभरती क्षमता

इसका शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब जटिल नौसैनिक प्लेटफॉर्म डिजाइन, निर्माण और तैनात करने में आत्मनिर्भर हो रहा है।

नाम का ऐतिहासिक महत्वImage Credit : Indian Navy07 / 07

नाम का ऐतिहासिक महत्व

जहाज का नाम मालाबार तट पर बसे ऐतिहासिक शहर ‘माहे’ पर रखा गया है, जबकि इसके प्रतीक चिह्न में कलारीपयट्टू की प्रसिद्ध ‘उरुमी’ तलवार को दर्शाया गया है, जो फुर्ती, सटीकता और दक्षता का प्रतीक है।

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