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ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष शरत पटनायक पर फेंकी गई स्याही, कांग्रेस भवन में कर रहे थे मीटिंग

Odisha News: ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष शरत पटनायक पर स्याही फेंकी गई है। यह घटना कांग्रेस भवन में हुई। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक मास्क लगे दिख रहे हैं।

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ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष शरत पटनायक पर फेंकी गई स्याही

Photo : Times Now Digital

Odisha News: भुवनेश्वर के कांग्रेस भवन में ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष शरत पटनायक पर स्याही फेंकी गई। यह घटना तब हुई जब पटनायक अपने कार्यालय में थे और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। बताया जा रहा है कि कुछ युवक शरत पटनायक के कार्यालय में घुसे और उन पर स्याही फेंककर भाग गए। यह हमला हाल ही में हुए लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण कार्यकर्ताओं में असंतोष के चलते हुआ माना जा रहा है।

घटना के बाद, वरिष्ठ कांग्रेस नेता तुरंत कांग्रेस भवन पहुंचे और शरत पटनायक से मुलाकात कर स्थिति पर चर्चा की। स्याही फेंकने के पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह सिर्फ चुनाव परिणामों के कारण था या इसके पीछे अन्य कारण भी थे। बता दें, यह घटना चुनाव परिणामों के बाद पार्टी सदस्यों और समर्थकों में बढ़ती निराशा को दर्शाती है। ओडिशा में कांग्रेस पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति और प्रबंधन के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। आज की घटना पार्टी नेतृत्व के लिए बढ़ती चुनौतियों को और बढ़ा देती है।

पार्टी कार्यालय में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठी अधिकारियों ने बताया कि शपत पटनायक सुरक्षित हैं और इस घटना में उन्हें कोई भी चोट की सूचना नहीं है। हालांकि, घटना ने पार्टी कार्यालयों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। उधर, दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू कर दी गई है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें स्याही फेंकने वाले युवक मास्क पहने दिख रहे हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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