Indore Bhopal Expressway: भोपाल इंदौर एक्सप्रेसवे का काम जारी है। प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। एक बार इस प्रक्रिया के पूरी हो जाने के बाद परियोजनाओं के अन्य पहलुओं पर काम शुरू किया जाएगा।
ये हैं खुबियां
प्रस्तावित भोपाल-इंदौर एक्सप्रेसवे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ट्रैफिक संबंधी कई समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी। साथ ही दुर्घटनाओं में भी कमी देखने को मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे छह लेन की होगी। इस बनाने में 5,000 करोड़ रुपये का खर्च होगा। यह छह लेन का ग्रीन फील्ड कॉरिडोर इंदौर और भोपाल के बीच की दूरी को 195 किमी से घटाकर 157 किमी कर देगा और यात्रा का समय घटाकर केवल 2 घंटे कर देगा।
होगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
भोपाल-इंदौर एक्सप्रेसवे के निर्माण के साथ-साथ ही साइड में एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का भी निर्माण किया जाएगा। यहां व्यापार को आसान बनाने के लिए नए टाउनशिप के विकास के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी मौजूद रहेंगी। इसे 2030 तक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसपर 16 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सात एंट्री प्वाइंट
इस परियोजना के लिए 1500 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए 530 करोड़ रुपये की भारी राशि निर्धारित की गई है। एक्सप्रेसवे के पूरे मार्ग में केवल सात एंट्री प्वाइंट होंगे। ये एंट्री प्वाइंट कोलार, मंडीदीप, आष्टा में होंगे।
कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
जब इस परियोजना की घोषणा की गई थी, तब इस पूरे प्रोजेक्ट को दिसंबर 2022 तक पूरा किया जाना था। हालांकि अब परियोजना में देरी होती दिख रही है। कारण है कि अभी भोपाल और इंदौर के बीच पहले से ही एक अच्छी सड़क मौजूद है। जिसके कारण इस सड़क की अभी के समय में उपयोगिता कम बताई जा रही है। साथ ही फंड की कमी भी इस परियोजना में देरी की एक वजह बताई जा रही है।
