IndiGo पर DGCA की सख्त कार्रवाई, 22 करोड़ से ज्यादा का लगा जुर्माना; पीटर एल्बर्स को भी चेताया
- Edited by: अनुराग गुप्ता
- Updated Jan 17, 2026, 10:06 PM IST
IndiGo Flight Disruptions: नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पिछले माह देशभर में हुए बड़े पैमाने पर फ्लाइट संकट को लेकर देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) पर सख्त कार्रवाई की है। डीजीसीए ने एयरलाइन पर 22 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया। साथ ही एयरलाइन मैनेजमेंट को सख्त चेतावनी भी दी है।
IndiGo पर DGCA की सख्त कार्रवाई (फाइल फोटो)
IndiGo Flight Disruptions: नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पिछले माह देशभर में हुए बड़े पैमाने पर फ्लाइट संकट को लेकर देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) पर सख्त कार्रवाई की है। डीजीसीए ने एयरलाइन पर 22 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया। साथ ही एयरलाइन मैनेजमेंट को सख्त चेतावनी भी दी है।
DGCA ने इंडिगो के CEO को चेताया
डीजीसीए ने इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीटर एल्बर्स को उड़ान परिचालन एवं संकट प्रबंधन की निगरानी पर्याप्त रूप से न करने को लेकर चेतावनी दी। डीजीसीए ने एयरलाइन पर एकमुश्त और निरंतर गैर-अनुपालन के मामलों में कुल 22.20 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। साथ ही 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने का भी निर्देश दिया है।
कितनी उड़ानें हुई थीं रद्द
इंडिगो फ्लाइट संकट के दौरान देशभर के एयरपोर्ट्स पर तीन लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए थे। विमानन नियामक ने 3 से 5 दिसंबर, 2025 के बीच इंडिगो परिचालन की विस्तृत जांच के बाद इस तरह की कार्रवाई की है। इस अवधि में एयरलाइन की 2,507 उड़ानें रद्द हुईं, जबकि 1,852 उड़ानों में भारी देरी हुई। बता दें कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जांच का आदेश दिया था जिसके बाद डीजीसीए की चार सदस्यीय समिति ने जांच की और जुर्माना लगाया।
IndiGo पर क्यों लगा भारी जुर्माना?
विमानन नियामक ने इंडिगो पर सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) के तहत छह गंभीर उल्लंघनों के लिए एकमुश्त 1.80 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया, जबकि लगातार हो रहे उल्लंघन को लेकर 20.40 करोड़ रुपये का दंड लगाया। बता दें कि एयरलाइन ने 5 दिसंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक कुल 68 दिनों तक नियमों का अनुपालन नहीं किया है।
IndiGo ने कौन-कौन से उल्लंघन किए
- फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) अनुपालन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू न करना
- रोस्टर में आवश्यक बफर की कमी
- क्रू की थकान प्रबंधन के बजाय व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता देना
- ऑपरेशनल कंट्रोल का अनुचित हस्तांतरण
- जवाबदेह प्रबंधन और नामित पदाधिकारियों की विफलता
बकौल डीजीसीए, यह कमियां एयर सेफ्टी और क्रू वेलफेयर दोनों के लिए ही गंभीर खतरा पैदा करती हैं। डीजीसीए ने एयरलाइन द्वारा किए गए उल्लंघनों को जानबूझकर और प्रणालीगत लापरवाही का मामला मानते हुए सख्त रुख अपनाया है।
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