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बाढ़ प्रभावित 14 राज्यों के लिए केंद्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जारी किए 5858.60 करोड़ रुपये

Flood Updates: भारत के कई राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है। लोगों की जिंदगी मुश्किलों में है, ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए बाढ़ प्रभावित 14 राज्यों को 5,858.60 करोड़ रुपये जारी किए हैं। आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि गृह मंत्रालय ने किस राज्य के लिए कितनी राशि जारी की है।

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मोदी सरकार का बड़ा फैसला।

New Delhi: गृह मंत्रालय ने बाढ़ प्रभावित 14 प्रदेशों को राज्य आपदा मोचन निधि से केंद्रीय हिस्से के रूप में और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से अग्रिम राशि के रूप में 5,858.60 करोड़ रुपये जारी किए हैं। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी है।

किस राज्य को कितनी राशि जारी की गई?

बयान के अनुसार केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र को 1,492 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 1,036 करोड़ रुपये, असम को 716 करोड़ रुपये, बिहार को 655.60 करोड़ रुपये, गुजरात को 600 करोड़ रुपये, तेलंगाना को 416.80 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल को 468 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। ये राज्य इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा, बाढ़ और भूस्खलन के कारण प्रभावित हुए हैं।

अब तक कितनी धनराशि जारी की जा चुकी है?

बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मोदी सरकार प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लोगों की मुश्किलें कम करने में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। सरकार ने बाढ़ प्रभावित राज्यों असम, मिजोरम, केरल, त्रिपुरा, नगालैंड, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मणिपुर में नुकसान का मौके पर आकलन के लिए अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय दल भेजे थे।

इसके अलावा, बिहार और पश्चिम बंगाल में नुकसान का मौके पर आकलन करने के लिए जल्द ही अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय दल भेजे जाएंगे। ये दोनों राज्य हाल ही में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसमें कहा गया है कि इस वर्ष 21 राज्यों को 14,958 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि जारी की जा चुकी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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