भारतीय सेना आने वाले समय की युद्ध चुनौतियों और निगरानी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने ड्रोन नेटवर्क को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी कर रही है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने संकेत दिए हैं कि सेना अब पारंपरिक सैन्य ढांचे के साथ-साथ ड्रोन आधारित निगरानी और संचालन क्षमता को भी तेजी से मजबूत करेगी।
इस रणनीति के तहत सेना ‘बाज बटालियन’ (Baaz Battalions) जैसी नई संरचनाएं तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिनका मुख्य फोकस निगरानी, ड्रोन संचालन और आधुनिक युद्धक्षेत्र में तेज प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना होगा। सेना का उद्देश्य केवल ड्रोन खरीदना नहीं, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, ऑपरेशन और सैन्य रणनीति का स्थायी हिस्सा बनाना है। उन्होंने आगे कहा कि ड्रोन युद्धक्षेत्र में पारंपरिक संचार उपकरणों की तरह ही आम हो जाएंगे। उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी विकसित होगी और लागत कम होगी, ड्रोन युद्ध के मैदान में रेडियो, नाइट-विजन डिवाइस और संचार उपकरणों की तरह ही सर्वव्यापी होते जाएंगे।"
सेना प्रमुख ने सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय सेना को बड़े पैमाने पर लगातार ड्रोनों की भर्ती, उनके अपग्रेडेशन और निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता होगी। इस रणनीतिक जरूरत को पूरा करने के लिए 'बाज बटालियन' का गठन सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक है। यह नई संरचना वर्तमान में संचालित 'रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट फ्लाइट्स' (RPA) के आधार पर ही विकसित की जाएगी। इन विशेष बटालियनों में एक ऐसा समर्पित और प्रशिक्षित सैन्य दल (विशेषज्ञ) शामिल होगा, जो भविष्य में पूरे ड्रोन इकोसिस्टम के संचालन और प्रबंधन को पूरी तरह संभालेगा।"
सेना के पास 50,000 से अधिक ड्रोन
जनरल द्विवेदी ने कहा, “लगभग दो साल पहले भारतीय सेना के पास केवल कुछ सौ ड्रोन थे। आज यह संख्या काफी बढ़ गई है और अब 50,000 से अधिक हो गई है। हमारी वर्तमान कार्ययोजना और परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर, हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले कुछ वर्षों में यह संख्या और बढ़ेगी और अगले दो से तीन वर्षों में संभावित रूप से दोगुनी हो जाएगी।”
सेना प्रमुख ने कहा, "पाकिस्तान की ड्रोन क्षमताओं से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए ,"जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखती है और उभरते खतरों का मुकाबला करने के लिए तैयार है।" उन्होंने आगे कहा,"यह स्पष्ट है कि वे ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों में महत्वपूर्ण निवेश कर रहे हैं और ऐसी क्षमताओं के लिए कई स्रोतों का उपयोग करना जारी रखे हुए हैं। हम इन घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखते हैं और क्षमताओं और इरादों दोनों का आकलन करते हैं।"
क्यों बढ़ाई जा रही है ड्रोन क्षमता?
हाल के वर्षों में दुनिया भर में युद्ध के स्वरूप में तेजी से बदलाव देखा गया है। निगरानी, लक्ष्य पहचान, सटीक हमला और सैनिकों की सुरक्षा में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ी है। इसी को देखते हुए भारतीय सेना भी मानव-आधारित और तकनीक-आधारित संचालन के मिश्रित मॉडल पर काम कर रही है।
सेना का फोकस सिर्फ खरीद नहीं, सिस्टम तैयार करना
सेना प्रमुख पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि लक्ष्य सिर्फ ड्रोन खरीदना नहीं, बल्कि पूरे सैन्य ढांचे में उनकी प्रभावी तैनाती और उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके लिए ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, बेहतर कमांड नेटवर्क और नए प्रशिक्षण मॉडल पर काम किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय सेना अगले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में सैनिकों को ड्रोन संचालन और संबंधित तकनीकों का प्रशिक्षण देने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए सैनिकों को तैयार करना है।
जनरल द्विवेदी ने कहा, “हमारे लिए किसी भी शत्रु के पास मौजूद ड्रोनों की सटीक संख्या से कहीं अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हम ड्रोन युद्धक्षेत्र में ड्रोनों का पता लगाने, उनका पीछा करने, उन्हें निष्क्रिय करने और उन पर प्रभुत्व स्थापित करने में कितने सक्षम हैं। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि भारतीय सेना वर्तमान और उभरते ड्रोन खतरों का मुकाबला करने के लिए सभी प्रकार के अभियानों में पूरी तरह से तैयार है।”
