भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'दुस्तलिक' का सातवां संस्करण 12 से 25 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को मजबूत करना और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को बढ़ाना है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस अभ्यास में भाग लेने के लिए भारतीय दल रवाना हो चुका है। यह प्रशिक्षण Gurumsaray Field Training Area में आयोजित किया जाएगा,जहां दोनों देशों की सेनाएं मिलकर विभिन्न सामरिक गतिविधियों का अभ्यास करेंगी। इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य फोकस गैरकानूनी सशस्त्र समूहों के खिलाफ ऑपरेशन की तैयारी और क्रियान्वयन पर रहेगा। इसके तहत सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में मिलकर प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
अभ्यास के दौरान कमान और नियंत्रण प्रणाली को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके जरिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच एकीकृत ऑपरेशनल ढांचा विकसित किया जाएगा, जिससे भविष्य में संयुक्त अभियानों को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सके।
इस सैन्य अभ्यास का समापन 48 घंटे के एक बड़े संयुक्त ऑपरेशन के साथ होगा,जिसमें अब तक सीखी गई रणनीतियों और कौशल का परीक्षण किया जाएगा। यह फाइनल ड्रिल इस बात का आकलन करेगी कि दोनों देशों की सेनाएं मिलकर जमीनी हालात में कितनी प्रभावी कार्रवाई कर सकती हैं।
60 भारतीय जवान होंगे शामिल
इस अभ्यास के लिए गए भारतीय दल में कुल 60 जवान शामिल हैं,जिनमें 45 भारतीय सेना के और 15 वायुसेना के जवान हैं। इनमें ज्यादातर सैनिक महार रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं। वहीं, उज्बेकिस्तान की ओर से भी लगभग 60 सैनिक इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं, जो उसकी सेना और वायु सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वार्षिक सैन्य अभ्यास है ‘दुस्तलिक’
‘दुस्तलिक’ एक वार्षिक सैन्य अभ्यास है, जो बारी-बारी से भारत और उज्बेकिस्तान में आयोजित किया जाता है। इसका पिछला संस्करण अप्रैल 2025 में पुणे के औंध स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में हुआ था। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
