Hardeep Singh Nijjar : भारतीय विदेश मंत्रालय ने रविवार को उस मीडिया रिपोर्ट को खारिज किया जिसमें कहा गया है कि हरदीप सिंह निज्जर सहित खालिस्तानी आतंकवादियों को 'रास्ते से हटाने' के लिए एमईए ने नॉर्थ अमेरिका में अपने दूतावासों को एक 'गोपनीय मेमो' भेजा था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने फर्जी रिपोर्ट के लिए अमेरिकी मीडिया संस्थान की खिंचाई भी की।
मीडिया संस्थान की आलोचना की
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची ने अपने एक बयान में इस रिपोर्ट को 'फर्जी एवं पूरी तरह से मनगढ़त' बताया। उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के इशारे पर इस तरह का फर्जी एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए इस मीडिया संस्थान की आलोचना की। बागची ने कहा कि यह रिपोर्ट भारत के खिलाफ दुष्प्रचार का हिस्सा है। मीडिया संस्थान जो सवालों के घेरे में वह पाकिस्तानी इंटेलिजेंस के इशारे पर फर्जी एजेंडा चलाने के लिए जाना जाता है।
गत जून में सरे शहर में हुई निज्जर की हत्या
अमेरिका के इस मीडिया संस्थान ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि गत अप्रैल में एमईए की ओर से कथित रूप से एक मेमो भेजा गया। इस मेमो में नॉर्थ अमेरिका के दूतावासों को निज्जर के खिलाफ ठोस कदम उठाने का निर्देश था और इसके दो महीने बाद कनाडा के सरे शहर में निज्जर की हत्या हो गई।
कनाडा ने भारत पर आरोप लगाया
कनाडा ने निज्जर की हत्या में भारतीय संलिप्तता का आरोप लगाया। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में आरोप लगाया कि खालिस्तानी निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट का हाथ है। ट्रूडो के इस आरोप भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि इस बारे में कनाडा के पास अगर कोई सबूत है तो उसे देना चाहिए लेकिन कनाडा ने अभी तक अपने आरोप के बारे में भारत को कोई साक्ष्य नहीं दिया है। निज्जर हत्या मामले का असर भारत और कनाडा के आपसी रिश्तों पर पड़ा।
निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स नाम से एक संगठन चलाता था। भारत विरोधी गतिविधियों के लिए भारत सरकार ने साल 2020 में निज्जर को आतंकवादी घोषित कर दिया।
