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न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री से मिले पीएम मोदी; भारत-न्यूजीलैंड ने रक्षा समझौते पर किए हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान लक्सन ने कहा कि दूरी हमारे उज्जवल भविष्य की खोज में कोई बाधा नहीं है। साथ ही भारत और न्यूजीलैंड ने रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। आपको इससे जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

India New Zealand sign Defence Agreement: भारत और न्यूजीलैंड ने अपने रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों को संस्थागत रूप देने के लिए सोमवार को एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न्यूजीलैंड के अपने समकक्ष को उनके देश में कुछ गैरकानूनी तत्वों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिए जाने पर चिंता से अवगत कराया।

भारत, न्यूजीलैंड ने रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए

मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने समग्र द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, विशेष रूप से व्यापार, रक्षा, शिक्षा और कृषि के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापक वार्ता की। मोदी ने मीडिया को अपने वक्तव्य में कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी को मजबूत एवं संस्थागत बनाने का निर्णय लिया है तथा रक्षा उद्योग क्षेत्र में सहयोग के लिए एक खाका तैयार किया जाएगा।

उन्होंने कहा, 'हम दोनों आतंकवाद के खिलाफ एकमत हैं। चाहे वह 15 मार्च 2019 का क्राइस्टचर्च आतंकवादी हमला हो या 26 नवंबर 2008 का मुंबई हमला, किसी भी रूप में आतंकवाद अस्वीकार्य है।'

आतंकवादी हमलों के दोषियों के बारे में क्या बोले मोदी?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवादी हमलों के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। मोदी ने कहा, 'हम आतंकवादी, अलगाववादी और कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।' उन्होंने कहा, 'इस संदर्भ में, हमने न्यूजीलैंड में कुछ गैरकानूनी तत्वों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों के बारे में अपनी चिंता साझा की।'

मोदी ने कहा कि भारत को विश्वास है कि उसे इन सभी 'गैरकानूनी तत्वों' के खिलाफ न्यूजीलैंड सरकार से सहयोग मिलता रहेगा।

मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत शुरू करने का फैसला

प्रधानमंत्री ने भारत और न्यूजीलैंड द्वारा पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू करने के निर्णय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'इससे आपसी व्यापार और निवेश की संभावना बढ़ेगी। डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और फार्मा जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।' मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, 'हम विस्तारवाद की नहीं, बल्कि विकास की नीति में विश्वास करते हैं।'

चर्चा के दौरान क्या बोले न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री लक्सन?

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने और मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण रणनीतिक दृष्टिकोण पर चर्चा की। लक्सन ने कहा, 'मैंने समृद्ध हिंद-प्रशांत में योगदान देने के लिए अपने-अपने हितों पर साझा चिंताओं को दूर करने की हमारी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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