Power Transmission Deals: सीमा पार से उच्च क्षमता वाली दो नई बिजली संचरण लाइन चालू करने के लिए भारत और नेपाल ने बुधवार को अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच बिजली कारोबार में मजबूती और क्षेत्रीय रक्षा सहयोग को बल मिलेगा। बिजली मंत्रालय के मुताबिक भारत के पावरग्रिड (महारात्न कंपनी) और नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के बीच इन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर एवं नेपाल के ऊर्चा, जल संसाधन एवं सिचाई मंत्री कुलमन घिसिंग की उपस्थिति में इन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
संयुक्त उपक्रम संस्थाओं की स्थापना होगी
बैठक का केंद्र बिंदु दोनों देशों के बीच बिजली क्षेत्र में चल रहे सहयोग को और मजबूत करना था। इन समझौतों के तहत भारत और नेपाल में दो संयुक्त उपक्रम संस्थाओं की स्थापना की जाएगी, जो उच्च क्षमता वाले सीमा-पार बिजली संचरण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए होंगी। दो नए 400 केवी (किलोवोल्ट) ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट — इनरुवा (नेपाल)-न्यू पूर्णिया (भारत) और लामकी (डोडोहरा) (नेपाल)-बरेली (भारत) — दोनों देशों के बीच तेज़ और अधिक विश्वसनीय बिजली संचरण को मजबूत करेंगे।
दोनों मंत्रियों ने कई मुद्दों पर चर्चा की
विद्युत मंत्रालय के प्रेस वक्तव्य के अनुसार, बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने कई मुद्दों पर चर्चा की, जिनमें नेपाल में जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति भी शामिल थी। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय ग्रिड कनेक्टिविटी पहलों पर भी विचार-विमर्श किया, जिससे सीमा-पार बिजली व्यापार को सुगम बनाया जा सके, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सके, और भारत व नेपाल के बीच स्वच्छ ऊर्जा संसाधनों के एकीकरण को बढ़ावा दिया जा सके। मंत्रालय ने आगे कहा कि 'इन ट्रांसमिशन कॉरिडोरों के पूरा हो जाने पर भारत और नेपाल के बीच बिजली विनिमय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, ग्रिड की लचीलापन में सुधार होगा, और दोनों देशों में सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।'
नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर भारत और नेपाल के बीच बिजली साझेदारी को और बेहतर बनाएंगे, जो दशकों पुराने कूटनीतिक संबंधों और सतत विकास तथा ऊर्जा सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।
