Heatwave Alert: देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक आज 27 और कल 28 मई 2026 को देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर बना रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में रेड अलर्ट जैसी स्थिति रहेगी, जहां गंभीर हीटवेव (Severe Heatwave) लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। हालांकि 29 मई से तापमान में गिरावट शुरू होने और गर्मी से राहत मिलने की संभावना जताई गई है।

आईएमडी मौसम चेतावनी (फोटो सोर्स - IMD)
यहां मंडरा रहा हीटवेव का खतरा
27 और 28 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भीषण हीटवेव का खतरा रहेगा। पश्चिमी राजस्थान और पूर्वी राजस्थान में भी गंभीर गर्मी का असर देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में भी भीषण लू चलने की संभावना है। इसके अलावा तेलंगाना, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में भी हीटवेव की चेतावनी जारी की गई है। बाकी अन्य इलाकों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।
दोपहर के समय बचने की सलाह
मौसम विभाग ने खास तौर पर दिल्ली-एनसीआर, जयपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, भोपाल, ग्वालियर, नागपुर और चंडीगढ़ जैसे शहरों में लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। कई इलाकों में तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है। इसके साथ ही 28 से 30 मई के बीच उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत में तेज आंधी, गरज-चमक और 70 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की भी संभावना है, जिससे मौसम में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यूपी का बांदा रहा सबसे गर्म शहर
उत्तर प्रदेश का बांदा मंगलवार को भी देश का सबसे गर्म शहर रहा। मौसम विभाग के मुताबिक 26 मई 2026 को यहां अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते दिनभर सड़कें सूनी नजर आईं, वहीं रात में भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल सकी। बांदा में लगातार नौ दिनों से तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है। इससे पहले 25 मई को भी यह शहर देश में सबसे अधिक गर्म दर्ज किया गया था, जब तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। हालांकि मंगलवार को तापमान में मामूली 0.2 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई, लेकिन यह अब भी सामान्य से करीब 4 डिग्री अधिक बना रहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने की देशवासियों से यह अपील
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर देशवासियों से अपील करते हुए लिखा कि, "देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जितनी अधिक सावधानी बरत सकें, अवश्य बरतें। कृपया स्वयं को हाइड्रेटेड रखें, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें। ऐसे मौसम में आपकी संवेदनशीलता भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है। यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें। मैं ऐसे लोगों की सराहना भी करूँगा जो अपने घरों के और दुकानों के बाहर मटके में जल रखते हैं ताकि कोई भी उनसे पानी पी सके।"
हीटवेव क्या होता है?
हीट वेव यानी लू ऐसी स्थिति होती है जब किसी क्षेत्र में लगातार दो या उससे अधिक दिनों तक तापमान सामान्य से काफी ज्यादा बना रहता है। अत्यधिक गर्म मौसम और तेज गर्म हवाओं के कारण लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। मौसम में बदलाव के दौरान लू चलना एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अब इसका प्रभाव पहले की तुलना में अधिक तेज और लंबे समय तक देखने को मिल रहा है। पृथ्वी के तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने से दिन और रात दोनों ही ज्यादा गर्म होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ती गर्मी और बार-बार पड़ने वाली हीटवेव की घटनाओं से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं। इससे डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है, वहीं कई मामलों में जान जाने का खतरा भी बना रहता है।
कैसे तय होती है लू की स्थिति?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, जब मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तब हीटवेव यानी लू की स्थिति मानी जाती है। वहीं पहाड़ी इलाकों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर लू का प्रभाव माना जाता है। अगर तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाए, तो इसे अत्यंत गंभीर या खतरनाक हीटवेव की श्रेणी में रखा जाता है। तटीय इलाकों में मौसम की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए वहां 37 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर भी लू जैसी स्थिति बन सकती है। अधिक गर्म और शुष्क हवाएं लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती हैं, जिससे गर्मी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर भारत में हीटवेव का दौर मार्च से जून के बीच देखने को मिलता है। हालांकि कुछ मामलों में इसका असर जुलाई तक भी बना रह सकता है। देश में मई का महीना सबसे ज्यादा गर्म माना जाता है, जब लू और अत्यधिक तापमान अपने चरम पर पहुंच जाते हैं।
