भारत ने बांग्लादेश में तैनात अपने अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का लिया फैसला, यह है वजह
- Edited by: रवि वैश्य
- Updated Jan 21, 2026, 02:30 PM IST
भारत ने मंगलवार को बांग्लादेश में सुरक्षा हालात को देखते हुए वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया।
बांग्लादेश में बिगड़े हैं हालात (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
बांग्लादेश में मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत ने मंगलवार को वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया।बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने से कुछ सप्ताह पहले भारत ने ये कदम उठाया है।आधिकारिक सूत्रों ने कहा, 'सुरक्षा स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर हमने उच्चायोग और अन्य पदों पर तैनात अपने अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी है।' उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मिशन (उच्चायोग) खुले हैं और सभी पदों पर कर्मी कार्यरत हैं।
ढाका में स्थित उच्चायोग के अलावा चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में भी भारत के राजनयिक कार्यरत हैं।अभी ये पता नहीं चल पाया है कि राजनयिकों और अन्य अधिकारियों के परिवार भारत कब लौटेंगे।ऐसी सूचना है कि भारत ने बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए बांग्लादेश को ‘‘गैर-पारिवारिक’’ गंतव्य बनाने का निर्णय लिया है।
भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण
पड़ोसी देश पाकिस्तान भी भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए एक 'गैर-पारिवारिक' गंतव्य है।अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने पर भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए।
भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर होने वाले हमलों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है।
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल वितरण से जुड़े 1996 के समझौते को नए सिरे से लागू करने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं। इस बीच बिहार के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। नए प्रस्तावित समझौते में यह संभावना जताई जा रही है कि शुष्क मौसम के दौरान राज्य को लगभग 900 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस जल का उपयोग मुख्य रूप से पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
गंगा जल बंटवारे को लेकर 1996 में किया गया समझौता
सूत्रों की मानें तो गंगा जल बंटवारे को लेकर 1996 में किया गया समझौता 12 दिसंबर 2026 को अपनी तय अवधि पूरी कर लेगा। इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने पहले ही इसकी समीक्षा और आगे की कार्ययोजना तैयार करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत एक आंतरिक समिति गठित की है। इस समिति की अंतिम रिपोर्ट में शुष्क मौसम के दौरान बिहार को लगभग 900 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने की अनुशंसा की गई है। अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित नए समझौते से बिहार को खास फायदा मिलने की संभावना है, क्योंकि दक्षिण बिहार के अनेक क्षेत्र हर वर्ष गर्मियों में गंभीर जल संकट का सामना करते हैं।
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