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भारत-जर्मनी डिफेंस डील ने भरी नई उड़ान, दुबई एयरशो में ऐतिहासिक टेक ट्रांसफर करार

नई दिल्ली और दुबई में दो दिनों के भीतर भारत–जर्मनी रक्षा साझेदारी में अहम प्रगति हुई। दिल्ली में हाई डिफेंस कमेटी की बैठक में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी, जबकि दुबई एयरशो 2025 में HAL और जर्मनी की HENSOLDT के बीच LiDAR-आधारित हेलिकॉप्टर Obstacle Avoidance System के तकनीकी हस्तांतरण और सह-विकास का बड़ा समझौता हुआ।

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भारत-जर्मनी डिफेंस डील ने भरी नई उड़ान

Photo : Times Now Digital

India Germany Defence Deal: भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग ने दो दिनों में नई गति पकड़ ली है। मंगलवार को नई दिल्ली में हुई हाई डिफेंस कमेटी की बैठक में दोनों देशों ने सैन्य-से-सैन्य सहयोग बढ़ाने, संयुक्त अभ्यासों में भागीदारी बढ़ाने और रक्षा उपकरणों के सह-विकास को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। जर्मनी ने 2026 में होने वाले भारत के बहुराष्ट्रीय एयर कॉम्बैट अभ्यास तरण शक्ति और नौसैनिक अभ्यास मिलन में भाग लेने की आधिकारिक पुष्टि भी की।

इसी क्रम में बुधवार सुबह दुबई एयरशो 2025 में एक बड़ा रक्षा-औद्योगिक करार सामने आया, जहां HAL और जर्मनी की HENSOLDT ने हेलिकॉप्टरों के लिए उन्नत LiDAR-आधारित Obstacle Avoidance System (OAS) के तकनीकी हस्तांतरण और सह-विकास पर हस्ताक्षर किए। यह लगभग तीन दशकों में भारत–जर्मनी के बीच सबसे बड़ा रक्षा तकनीक ट्रांसफर करार माना जा रहा है। समझौते के तहत HAL को डिजाइन और निर्माण से जुड़े IPRs मिलेंगे, साथ ही भारत में इस सिस्टम का उत्पादन, इंटीग्रेशन और सपोर्ट का पूरा अधिकार रहेगा। HAL को इस समाधान को विदेशों में निर्यात करने की अनुमति भी दी गई है।

क्या है यह नया Indo–German OAS सिस्टम?

यह सिस्टम हेलिकॉप्टरों को रियल-टाइम में बाधाओं का पता लगाने और खराब मौसम या कम दृश्यता में सुरक्षित उड़ान में मदद करता है। इसमें शामिल है:

- HENSOLDT का SferiSense LiDAR सेंसर हेड

- Degraded Visual Environment (DVE) कंप्यूटर

- सिंथेटिक विज़न, 3D ग्राफिक्स और हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले पर रियल-टाइम फीड

यह सिस्टम पतले तार, केबल, पोल, टॉवर जैसे मुश्किल-से-मुश्किल अवरोधों का 99% से अधिक सटीकता के साथ 1,000 मीटर से ज्यादा दूरी पर पता लगा सकता है, जो पारंपरिक रडार से लगभग असंभव होता है।

यह अत्याधुनिक OAS सिस्टम पतले तार, केबल, पोल, टावर जैसे कठिन अवरोधों का 1,000 मीटर से अधिक दूरी पर सटीक पता लगाने में सक्षम है और विशेष रूप से भारत जैसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनल इलाकों (लद्दाख, सियाचिन, अरुणाचल, वन क्षेत्रों और रेगिस्तानों) में उड़ान सुरक्षा को मजबूत करेगा। इसे सबसे पहले LCH प्रचंड और ALH ध्रुव जैसे स्वदेशी हेलिकॉप्टरों पर लगाया जाएगा।

दुबई में हुआ यह करार भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ले जाता है, जिनके पास सॉवरेन LiDAR - आधारित हेलिकॉप्टर OAS तकनीक है- पूरी तरह से निर्यात-सक्षम और भारत में निर्मित प्रणाली।

Shivani Mishra
Shivani Mishraauthor

Covering stories of public interest in crime and politics now. Entertainment enthusiast over five years. Reporting across Maharashtra.

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