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रणनीतिक भागीदारी को नई ऊंचाई पर ले गए भारत-EU, दिल्ली में हुई JSC की पहली बैठक, त्रिपक्षीय ढांचे पर करेंगे काम

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन और विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव प्रियंका चौहान ने की। चर्चा का केंद्र त्रिपक्षीय सहयोग को मजबूत करना और साझेदार देशों में प्रमुख विकासात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त तंत्र विकसित करना रहा।

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दिल्ली में हुई भारत-ईयू जेएससी की बैठक। तस्वीर-MEA, Twitter

India-EU JSC meeting : तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत और यूरोप अपने सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत-यूरोप त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क की स्टीयरिंग कमेटी की पहली बैठक हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में हुई इस बैठक के बारे में बताया कि भारत और ईयू की रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों पक्षों ने एक सहयोगात्मक त्रिपक्षीय ढांचे में काम करने पर सहमति जताई है।

विश्वभर में विकास संबंधी चुनौतियों निपटेंगे

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन और विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव प्रियंका चौहान ने की। चर्चा का केंद्र त्रिपक्षीय सहयोग को मजबूत करना और साझेदार देशों में प्रमुख विकासात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त तंत्र विकसित करना रहा। एक्स (X) पर एक पोस्ट में जायसवाल ने कहा, 'रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना! भारत-ईयू त्रिपक्षीय सहयोग के लिए संयुक्त संचालन समिति (JSC) की पहली बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता @EUAmbIndia हर्वे डेल्फिन और MEA की संयुक्त सचिव प्रियंका चौहान ने की। त्रिपक्षीय सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हुए, JSC ने विश्वभर में विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त रूप से समाधान तैयार करने और उन पर मिलकर काम करने की रूपरेखाओं पर सहमति जताई।'

त्रिपक्षीय ढांचे में काम करने पर बनी सहमति

उन्होंने आगे कहा कि समिति ने साझा मूल्यों, पारस्परिक हितों और समान विकासात्मक प्राथमिकताओं के आधार पर साझेदार देशों के साथ जुड़ने पर सहमति व्यक्त की। प्रवक्ता ने आगे कहा कि 'JSC ने साझा मूल्यों, पारस्परिक हितों और समान विकासात्मक प्राथमिकताओं के आधार पर साझेदार देशों के साथ सहयोग करने तथा प्राथमिक क्षेत्रों और क्षेत्रों में विकास सहयोग परियोजनाओं को लागू करने के लिए एक सहयोगात्मक त्रिपक्षीय ढांचे में काम करने पर सहमति जताई।'

एक मजबूत और एकजुट पक्ष रखा

इस बीच, मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया कि भारतीय उद्योग जगत के नेताओं, नीति-निर्माताओं और राजनयिकों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को शीघ्र अंतिम रूप देने के पक्ष में एक मजबूत और एकजुट पक्ष रखा। उनका तर्क था कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के दौर में यह समझौता निर्यात वृद्धि, आपूर्ति-श्रृंखला की मजबूती और दीर्घकालिक निवेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह भावना 'भारत-ईयू शिखर सम्मेलन: FTA और आगे का रास्ता' शीर्षक से आयोजित एक उच्चस्तरीय संवाद में उभरकर सामने आई, जिसका संयुक्त आयोजन चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF) और सेंटर फॉर ग्लोबल इंडिया इनसाइट्स (CGII) ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया। यह चर्चा दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान भारत-ईयू FTA को लेकर बनी नई राजनीतिक गति की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई।

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आलोक कुमार राव
आलोक कुमार राव author

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारो... और देखें

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