India-China Population:चीन की आबादी में साल 1961 के बाद पहली बार कमी दर्ज की गई है। चीन के सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार देश का जनसांख्यिकीय संकट 2022 में गहरा गया, क्योंकि 1961 के बाद पहली बार गिरती जन्म दर के कारण इसकी आबादी में कमी दर्ज की गई है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की जनसंख्या में आई गिरावट और भारत की बढ़ती आबादी के कारण दोनों देशों के बीच जनसंख्या का अंतर काफी कम रह गया है। 19 जनवरी तक की रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों के बीच केवल 21 लाख का अंतर रह गया है। यानी भारत अब जल्द ही आबादी के मामले में चीन को पछाड़ देगा और दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा।
क्या कहते हैं आंकड़े
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार चीन की आबादी 19 जनवरी को शाम 7 बजे तक 1,425,829,945 जनसंख्या पहुंच गई थी। जबकि भारत की जनसंख्या 1,422,755,535 हो गई थी। इस मतलब है कि दोनों देशों के बीच केवल 21 लाख का रह गया है। ऐसे में संभवाना कि भारत 2023 में कभी चीन को पछाड़ कर सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र संघ की जुलाई 2022 में आई रिपोर्ट World Population Prospects, 2022 के अनुसार भारत 2023 में आबादी के मामले चीन को पछाड़ देगा। भारत की आबादी दुनिया की आबादी का करीब 17 फीसदी है। वहीं WWF और ग्लोबल प्रिंट नेटवर्क की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आबादी को देखते हुए, उसकी धरती पर मौजूद जैविक संसाधनों में 171 फीसदी की कमी है। यानी जब इस कमी को पूरा किया जाएगा तब कहीं जाकर, वह भारत की 141 करोड़ की आबादी के लिए पर्याप्त होंगे।
वहीं अगर राज्यों के आधार पर देखा जाय तो भारत के कई राज्य दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देशों से भी ज्यादा है। मसलन उत्तर प्रदेश की जनसंख्या इस समय अनुमान के अनुसार 23 करोड़ पहुंच चुकी है। इस आधार पर वह दुनिया में पांचवा सबसे अधिक आबादी वाले देश के पायदान पर पहुंच चुका है। इस समय पाकिस्तान की आबादी जहां उसके बराबर है। वहीं ब्राजील, नाइजीरिया, बांग्लादेश, रूस , मैक्सिको जैसे टॉप-10 वाले देश पीछे हो चुके हैं।
| भारत के राज्य | आबादी (अनुमानित) | देश | आबादी (अनुमानित) |
| उत्तर प्रदेश | 23.15 करोड़ | पाकिस्तान | 23.14 करोड़ |
| ब्राजील | 21.6 करोड़ | ||
| नाइजीरिया | 21.0 करोड़ | ||
| बांग्लादेश | 16.8 करोड़ | ||
| बिहार | 12.8 करोड़ | जापान | 12.55 करोड़ |
| महाराष्ट्र | 12.4 करोड़ | फिलीपींस | 11.33 करोड़ |
| पश्चिम बंगाल | 10 करोड़ | विएतनाम | 9.94 करोड़ |
| टर्की | 8.66 करोड़ | ||
| ईरान | 8.65 करोड़ |
जनसंख्या नीति पर राजनीति
भारत में बढ़ती जनसंख्या के बीच बीच-बीच नई जनसंख्या नीति की भी मांग उठती रही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत ने दशहरे के मौके पर कहा था कि साल 2000 में भारत सरकार ने समग्रता से विचार कर एक जनसंख्या नीति का निर्धारण किया था। उसमें एक महत्वपूर्ण लक्ष्य 2.1 के प्रजनन दर (TFR) को प्राप्त करना था। NFHS की रिपोर्ट के अनुसार , समाज की जागरूकता और सकारात्मक सहभागिता तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के कोशिशों के परिणामस्वरूप प्रजनन दर 2.1 से भी कम लगभग 2.0 के प्रजनन दर पर आ गई है । लेकिन जनसंख्या नियंत्रण के साथ साथ पंथ के आधार पर जनसंख्या संतुलन भी महत्व का विषय है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। वहीं विपक्षी दल इसे आरएसएस और भाजपा को अल्पसंख्यकों को दबाने की राजनीति मानते हैं।
राजनीति के बीच संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट भी कई अहम तस्वीर पेश करती है। उसके अनुसार 2050 तक भारत की आबादी 166 करोड़ से ज्यादा होगी। जबकि चीन की आबादी घटकर 131 करोड़ के करीब पहुंच जाएगी। साफ है कि भारत पर जनसंख्या का बड़ा बोझ होगा। और संसाधन सीमित होते जाएंगे।
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