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अजित पवार को किसने दिया मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर? फिर गरमाई महाराष्ट्र की सियासत

उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूटीबी) के नेता विनायक राउत ने शरद पवार के भतीजे को ऑफर देते हुए कहा है कि अजित पवार मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो उन्हें एमवीए में वापस आना चाहिए। पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में ‘महायुति’ ने राज्य की 288 सीट में से 230 सीट जीती थीं, जबकि एमवीए महज 46 सीट पर सिमट गई थी।

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शरद पवार और अजित पवार।

Maharashtra Politics: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता विनायक राउत ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार अगर मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, तो उन्हें महा विकास आघाडी (एमवीए) में वापस आ जाना चाहिए। शिवसेना (उबाठा) के सचिव ने कहा कि पवार महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ मौजूदा गठबंधन में मुख्यमंत्री नहीं बन सकते।

'मुख्यमंत्री बनना है, तो एमवीए में वापस आएं अजित पवार'

सत्तारूढ़ गठबंधन ‘महायुति’ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना शामिल हैं। रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग के सांसद रह चुके राउत ने कहा, 'अजित पवार वर्तमान में जिस गठबंधन में हैं, उसमें वह कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनना है, तो उन्हें एमवीए में वापस आना होगा। मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने के बजाय, उन्हें ऐसी जगह आना चाहिए, जहां उन्हें वह अवसर मिल सके।'

मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा जाहिर कर चुके हैं अजित पवार

शरद पवार अतीत में सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा जाहिर कर चुके हैं। पिछले साल संपन्न विधानसभा चुनावों में ‘महायुति’ ने राज्य की 288 सीट में से 230 सीट जीती थीं, जबकि एमवीए महज 46 सीट पर सिमट गई थी।

चाचा शरद पवार की पार्टी में भतीजे अजित पावर ने डाली फूट

शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया था। जुलाई 2023 में अजित पवार और कुछ अन्य विधायकों के राज्य में शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने के बाद राकांपा में विभाजन हो गया था।

राजनीति में राज करने के लिए सबसे सटीक नीति का इस्तेमाल करने वाले को ही राजनीति का चाणक्य कहते हैं। चाचा-भतीजे की जंग में फिलहाल भतीजा अजित पवार सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हैं, पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में भतीजे ने एक बार फिर साबित किया कि वो चाचा से अधिक शक्तिशाली हैं। चुनावी नतीजे ने इस बात पर मुहर लगा दिया कि शरद पवार का जलवा अभी पहले जितना नहीं रहा, छोटे पवार उनसे आगे निकल चुके हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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