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घाटी में तैनात हुआ PAK का 'काल', जानिए भारत को क्यों उठाना पड़ा यह ठोस कदम

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 30, 2023, 02:22 PM IST

IAF moves Tejas in Kashmir: यह पहली बार नहीं है जब वायुसेना के इन विमानों को कहीं और ले जाया गया है। इससे पहले भी भारतीय वायुसेना द्वारा लद्दाख व जम्मू-कश्मीर में अपने विमानों को भेजती रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला घाटियों में उड़ान का अनुभव प्राप्त करने के लिए किया गया है।

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Tejas Fighter Jets

Photo : BCCL

IAF moves Tejas in Kashmir: कश्मीर घाटी में पड़ोसी पाकिस्तान को हद में रहना सिखाने के लिए भारतीय वायु सेना ने बड़ा कदम उठाया है। वायु सेना ने यहां अपने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को जम्मू और कश्मीर में भेजा है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला घाटियों में उड़ान का अनुभव प्राप्त करने के लिए किया गया है।

रक्षा अधिकारियों का कहना है कि बेड़े के पालयट घाटी में उड़ान भरक अनुभव इकट्ठा कर रहे हैं, जिससे उन्हें इसका फायदा समय आने पर मिल सके और वे घाटी के नियम-कायदों से भी वाकिफ हों। बता दें, जम्मू-कश्मीर में वायु सेना के कई अड्डे हैं, जो चीन और पाकिस्तान सहित दोनों मोर्चों पर सुरक्षा की दृष्टि से संचालन के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं।

पहले भी ले आए गए हैं विमान

बता दें, यह पहली बार नहीं है जब वायुसेना के इन विमानों को कहीं और ले जाया गया है। इससे पहले भी भारतीय वायुसेना द्वारा लद्दाख व जम्मू-कश्मीर में अपने विमानों को भेजती रही है। ऐसा इसलिए किया जाता है, जिससे वायुसेना के पायलटों को अलग-अलग इलाकों की परिस्थितियों के अनुसार उड़ान का अनुभव मिल सके।

बेहद खास है तेजस

बता दें, भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान तेजस बेहद ही खास है। यह सिंगल इंजन वाला 6500 किलोग्राम का हल्का लड़ाकू विमान है। सबसे खास बात यह है कि यह विमान स्वदेशी है और इसके 50 फीसदी पार्ट्स का निर्माण भारत में ही किया गया है। तेजस एक साथ 10 टारगेट को ट्रैक करने और उन्हें नेस्तनाबूत करने की क्षमता रखता है। इसमें इजराइल का रडार लगा है। इतना ही नहीं तेजस केा छेटे रनवे से भी टेकऑफ किया जाता है, जो इसे दुर्गम इलाकों में उड़ान भरने में सक्षम बनाता है। इसमें लेजर गाइडेट बम, क्लस्टर हथियार भी लगाए जा सकते हैं। एक बार में तेजस 3000 किलोमीटर की उड़ान भ्ज्ञर सकता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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