TMC Split: तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। एक तो ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता में एफआईआर दर्ज हो गई और दूसरी तरफ टीएमसी के बागी सांसदों के गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने वाला है, जहां वह खुद को 'असली टीएमसी' के तौर पर मान्यता दिए जाने की मांग करेंगे। इस गुट में वो नेता भी शामिल हैं, जो कभी खुद को ममता बनर्जी का करीबी बताते थे, उनमें सयोनी घोष भी हैं।
हालांकि, टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी के प्रति एकजुटता दिखाते हुए साफ कर दिया कि वह इस घड़ी में 'दीदी' के साथ हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ''मैं इस घड़ी में मजबूती से ममता बनर्जी के साथ खड़ा हूं और किसी अन्य दिशा में जाने का मेरा कोई इरादा नहीं है।'' इस दौरान, शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कर दिया कि वह सुख-दुख में ममता दीदी के साथी हैं।
'ममता दीदी ही मेरी नेता'
टीएमसी छोड़ने वाले तथाकथित 'बागी' सांसदों के बारे में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ''कुछ लोग प्रलोभन, डर या केंद्रीय एजेंसियों के दबाव की वजह से जा रहे होंगे। फिलहाल, मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं है। वह अपने ही रहे हैं... दोस्त, कलीग इत्यादि। उन्होंने आगे कहा कि मेरा नेता महज ममता बनर्जी ही हैं। बहरहाल, जो लोग बागी गुट में अभी गए हैं, उनको यह सोचना चाहिए कि शिकायत का जो पिटारा लेकर वो आए हैं, क्या यही घड़ी थी ममता बनर्जी, अभिषेक इत्यादि के खिलाफ शिकायत करने की।
उन्होंने कहा, ''जो लोग कल तक "दीदी-दीदी" करते थे, वे आज मुसीबत की घड़ी में उनके खिलाफ क्यों बोल रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि हार के बावजूद जनता में ममता बनर्जी की साख बनी हुई है और उनके पास 41 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर है, जो बहुत बड़ी बात है। अच्छी-अच्छी पार्टी के पास 41 फीसदी वोट नहीं है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज मुद्दे पर क्या बोले शत्रुघ्न सिन्हा?
शत्रुघ्न सिन्हा ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और संदेशखाली की घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि ये घटनाएं शर्मनाक हैं, लेकिन इसके लिए सीधे मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश (हाथरस/उन्नाव) की घटनाओं के लिए वहां के मुख्यमंत्रियों पर उंगली नहीं उठाई गई, वैसे ही यहां भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब चुनाव लड़ रहे थे तब उन्हें (बागियों) यह सब याद नहीं था। ममता बनर्जी बहुत मेच्योर लीडर हैं।
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कल्याण बनर्जी को लेकर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह देश के बेहतरीन सांसदों में से एक हैं। उन्होंने कहा, ''कल्याण बनर्जी की नाराजगी का कारण प्रोटोकॉल और अनुशासन से जुड़ा मामला हो सकता है, लेकिन कल्याण बनर्जी ने भी साफ किया है कि वे दीदी के साथ हैं और उनके साथ रहेंगे।''
'30 सालों तक मैं भाजपा में रहा'
उन्होंने कहा कि मैं किसी का नाम नहीं ले सकता हूं, लेकिन मैं 30 सालों तक भाजपा में रहा हूं और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व लालकृष्ण आडवाणी को अपना मार्गदर्शक मानते हैं। उन्होंने हमें ट्रेनिंग दी है... भाजपा में मेरे बहुत सारे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैं उनका नाम नहीं ले सकता हूं। अगर उन्होंने मुझे आमंत्रित किया होगा तो अच्छी नियत से किया होगा। शायद मेरा भला सोचकर किया होगा। हालांकि, मेरे सुख-दुख में ममता जी ने मेरा साथ दिया और आसनसोल की जनता के पास मुझे जाने का मौका दिया। इसके लिए मैं ममता बनर्जी और टीएमसी का आभारी हूं और आज उनका साथ निभाने का वक्त है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की प्रशंसा करने वाले पोस्ट पर उन्होंने साफ किया कि यह "स्पोर्ट्समैन स्पिरिट" और मित्रता के नाते दी गई बधाई थी। वो हमारे मित्र रहे हैं और मेरी कद्र करते हैं। हालांकि, इसका उनके राजनीतिक रुख से कोई लेना-देना नहीं है।
