Pawan Singh Net Worth: बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नौ उम्मीदवारों ने सोमवार को विधान परिषद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन दाखिल करने वालों में भोजपुरी स्टार पवन सिंह (Pawan Singh), मंत्री निशांत कुमार (Nishant Kumar)भी शामिल हैं। इन उम्मीदवारों ने अपना हलफनामा भी दायर किया है। हलफनामे के मुताबिक पवन सिंह की दौलत में इजाफा हुआ है। लोकसभा चुनाव 2024 के समय उनके पास करीब 16 करोड़ रुपए की संपत्ति थी जो अब बढ़कर लगभग 19.44 करोड़ रुपए की हो गई है। इसके अलावा पवन सिंह के पसा करीब 4 करोड़ रुपए की महंगी एवं लग्जरी गाड़ियां हैं।
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पवन सिंह के पास महंगी-लग्जरी गाड़ियां
2024 के हलफनामे के मुताबिक पवन सिंह के पास फॉर्चुनर टोयोटो, इनोवा हाई इरोस टोयोटो, लैंड रोवर/रेंज रोवर और स्कूटी-सुजुकी एम साइकिल है। अचल संपत्तियों की अगर बात करें तो पवन सिंह के पास नौ लाख रुपए से ज्यादा की कृषि भूमि और एक करोड़ रुपए से ज्यादा की गैर-कृषि भूमि है। उनके पास आरा और पटना में जमीन है। यही नहीं आरा में पवन सिंह के पास चार करोड़ रुपए से ज्यादा कॉमर्शियल इमारतें हैं। लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी, मुंबई में कई फ्लैट्स हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनके पास 70 लाख रुपये का सोने और 28 हजार रुपये की चांदी के गहने भी है।
पवन सिंह के पास 19.44 करोड़ की चल-अचल संपत्ति
रिपोर्टों के मुताबिक पवन सिंह के पास नकद मात्र 50 हजार रुपए हैं। हालांकि उनके पास लगभग 6.44 करोड़ रुपये की चल और 13 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। यानी पवन सिंह के पास 19.44 करोड़ की चल-अचल संपत्ति है। भोजपुरी स्टार के पास अलग-अलग बैंक खातों में 1.64 करोड़ रुपये जमा हैं। उनके पास कुल 3.83 करोड़ रुपये की गाड़ियां हैं। जबकि उनके पास 70 लाख रुपये का सोने और 28 हजार रुपये की चांदी के गहने भी है। पवन सिंह पर 6 आपराधिक मामले लंबित हैं। हालांकि, उन पर अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं और किसी भी मामले में वे दोषी नहीं ठहराए गए हैं।

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2024 में काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ा
नामांकन दाखिल करने के लिए पवन सिंह जब विधान परिषद पहुंचे तो उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। पवन सिंह ने वर्ष 2024 में पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से भाजपा का टिकट ठुकरा दिया था और बिहार की काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। माना जाता है कि उनके इस फैसले का शाहाबाद क्षेत्र में एनडीए के प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर पड़ा था, जहां सत्तारूढ़ गठबंधन को कई सीटें इंडिया गठबंधन के हाथों गंवानी पड़ी थीं।
विधानसभा चुनावों से पहले पवन सिंह ने की वापसी
हालांकि, पिछले वर्ष नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनावों से पहले पवन सिंह ने भाजपा में वापसी कर ली। उस दौरान उन्होंने कहा था कि वह पार्टी के 'सच्चे सिपाही' बने रहना चाहते हैं और उनकी वापसी का उद्देश्य चुनाव में टिकट हासिल करना नहीं है। अलग-अलग राज्यों में चुनाव के दौरान पवन सिंह भाजपा के लिए प्रचार करने पहुंचते रहे हैं। इन्हें देखने और सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग रैलियों में पहुंचते हैं। चुनावों में पवन सिंह की काफी मांग रहती है।
निशांत कुमार ने भी दाखिल किया नामांकन
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और राज्य सरकार में मंत्री निशांत कुमार नामांकन दाखिल करने के दौरान जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा तथा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के साथ मौजूद थे। हालांकि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार इस अवसर पर उपस्थित नहीं थे। पार्टी नेताओं के अनुसार वह रोहतास जिले में अपने एक पुराने मित्र से मिलने गए हुए थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान भी विधानसभा सचिवालय पहुंचे। चौधरी अप्रैल में बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने।
ओबीसी नेता शिवरानी देवी प्रजापति उम्मीदवार
भाजपा ने पवन सिंह और लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए मैदान में उतरे संजय मयूख के अलावा अनिल ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है। अनिल ठाकुर और शीला पंडित पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता रहे हैं और प्रदेश इकाई में विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं। जहां पवन सिंह और संजय मयूख सवर्ण समुदाय से आते हैं, वहीं अनिल ठाकुर और शीला पंडित अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) से हैं। भाजपा हाल के वर्षों में इस वर्ग के बीच अपने जनाधार को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। जदयू ने निशांत कुमार के अलावा पार्टी की प्रवक्ता रह चुकीं ईबीसी नेता भारती मेहता तथा पूर्व प्रदेश महासचिव एवं ओबीसी नेता शिवरानी देवी प्रजापति को उम्मीदवार बनाया है।

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अंसारी ने भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया
जदयू के एक अन्य उम्मीदवार ललन प्रसाद ने विधानपरिषद की उस सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया, जो जदयू के एक सदस्य के राज्यसभा सांसद बनने के बाद रिक्त हुई थी। इस बीच, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के उम्मीदवार और पार्टी संस्थापक रामविलास पासवान के करीबी सहयोगी अशरफ अंसारी ने भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। मौके पर मौजूद पार्टी के संसदीय बोर्ड अध्यक्ष और चिराग पासवान के बहनोई अरुण भारती ने कहा, 'हमारे नेता ने अपने पिता के सिद्धांतों का पालन किया है। रामविलास पासवान ने कभी बिहार में किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया था।’
18 जून को होगा मतदान
उन्होंने दिवंगत रामविलास पासवान के उस रुख का उल्लेख किया, जब उन्होंने 2005 के गुजरात दंगों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। बाद में 2008 में बिहार विधानसभा चुनाव के बाद त्रिशंकु स्थिति बनने पर रामविलास पासवान ने अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में समर्थन देने की बात कही थी। विधानपरिषद की जिन नौ सीट पर द्विवार्षिक चुनाव हो रहा है, उनमें से एक सीट पर मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 11 जून है, जबकि मतदान 18 जून को होगा।
