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राजकोट गेम जोन में कैसे लगी आग? जिसमें झुलसकर अब तक चार बच्चों समेत 28 लोगों की मौत; जानें सारा अपडेट

Rajkot Fire Updates: गुजरात के राजकोट शहर में शनिवार को दिल दहला देने वाला हादसा हो गया, जहां भीषण आग लगने से चार बच्चों समेत 28 लोगों की झुलसकर मौत हो गई। जिसके बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल एक्शन मोड में आ गए हैं। लेकिन सवाल ये है कि आखिर गेम जोन में ये आग लगी कैसा? आपको इस मामले स जुड़ा सारा अपडेट बताते हैं।

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राजकोट हादसे से जुड़ा अपडेट।

Photo : Times Now Digital

Gujarat News: गुजरात के राजकोट शहर में शनिवार शाम एक ‘गेम जोन’ में भीषण आग लगने से चार बच्चों समेत कम से कम 28 लोगों की मौत हो गई। अभी मौत का आंकड़ा थमा नहीं है, अधिकारियों ने यह जानकारी दी है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस ने बताया कि ‘गेम जोन’ के मालिक और प्रबंधक को हिरासत में लिया गया और पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। वहीं राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया है।

गेम जोन में कब लगी आग? जानें पूरा घटनाक्रम

अधिकारियों ने बताया कि गेमिंग गतिविधियों के लिए निर्मित फाइबर के एक ढांचे में शाम करीब साढ़े चार बजे आग लग गई, जिसके बाद प्रभावित टीआरपी गेम जोन में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। उन्होंने बताया कि भीषण आग के कारण ढांचा ध्वस्त हो गया। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) राधिका भराई ने कहा, 'आग की घटना में 28 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

अब तक 28 डेड बॉडी रिकवर किए गए हैं, लेकिन आइडेंटिफिकेशन के लिए अभी DNA सैंपल लिए जा रहे हैं। जिसके बाद सारी तस्वीरें साफ हो पाएंगी। शव पूरी तरह से जल गए हैं और उनकी पहचान करना मुश्किल है।' एसीपी विनायक पटेल ने कहा कि मृतकों में 12 साल से कम उम्र के कम से कम चार बच्चे शामिल हैं। तो वहीं जिले के अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान जारी होने के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

पल भर में सबकुछ तबाह, प्रत्यक्षदर्शियों से जानें

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाना-मावा रोड स्थित गेम जोन में यह हादसा उस समय हुआ जब बच्चों सहित कई लोग खेल रहे थे। सरकार ने घटना की जांच अपर पुलिस महानिदेशक सुभाष त्रिवेदी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपी है। राजकोट के जिलाधिकारी प्रभाव जोशी ने बताया, 'गेम जोन में आग लगने की सूचना अग्नि नियंत्रण कक्ष को शाम करीब 4:30 बजे मिली। आग बुझाने के लिए दमकल गाड़ियां और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं और मलबा हटाया जा रहा है।'

गेम जोन में कैसे लगी आग, कौन है जिम्मेदार?

राजकोट के गेम जोन में इस आग से जुड़ी मौत का अपडेट लगातार सामने आ रहा है। कार्रवाई के बारे में जानकारियां सामने आ रही हैं। हालांकि, भीषण आग लगने का सही कारण पता नहीं चल पाया है। सवाल ये उठता है कि आखिर गेम जोन में कैसे आग लगी और इसका असल जिम्मेदार कौन है? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घटना पर दुख जताया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत अन्य नेताओं ने भी घटना पर दुख जाहिर किया है।

राजकोट की घटना के बाद राज्य में अलर्ट मोड

राजकोट की घटना के बाद राज्य अलर्ट मोड में है। मुख्यमंत्री पटेल के आदेश के बाद वडोदरा और जूनागढ़ गेम जोन में जांच शुरू हो गई। गेम जोन में हुए हादसे में मौत का आंकड़ा 28 पहुंच गया है। घटना के बाद सूरत जिला प्रशासन भी अलर्ट हुआ, जहां आपातकाल बैठक बुलाई गई। सूरत पुलिस सहित सूरत महानगरपालिका, दक्षिण गुजरात विधुत निगम, टोरंट पॉवर, फायर ब्रिगेड के आला अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन ने बैठक की। शहर के अलग-अलग इलाकों में सरप्राइज चेकिंग शुरू किया गया। सूरत में करीबन 16 जगहों पर गेम ज़ोन पर बने है।

पीएम मोदी ने सीएम पटेल से की बातचीत

प्रधानमंत्री मोदी ने बचाव और राहत प्रयासों के बारे में जानकारी लेने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से बात की। पीएम ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "राजकोट में आग की घटना से हम सभी अत्यंत दुखी हैं। कुछ समय पहले गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल जी के साथ मेरी टेलीफोन पर बात हुई। उन्होंने मुझे प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया।"

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने व्यक्त किया गहरा दुख

राष्ट्रपति मुर्मू ने एक पोस्ट में कहा, 'गुजरात के राजकोट में एक 'गेम जोन' में आग लगने की घटना में लोगों की मौत के बारे में जानकर मुझे गहरा दुख हुआ है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मैं ईश्वर से हादसे में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।'

मल्लिकार्जुन खड़गे ने घटना पर जताया दुख

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भीषण आग की घटना में लोगों की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि इस मामले में जवाबदेही जल्द से जल्द तय हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राज्य सरकार के लचर रवैये के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।

ममता बनर्जी ने एक्स पर किया पोस्ट

इसके अलावा पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने ‘एक्स’ पर लिखा, 'गुजरात के राजकोट में आग लगने की घटना के बारे में जानकर स्तब्ध हूं, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों की जान चली गई। गेम जोन में लगी आग में कई अन्य लोग फंस गए, जो चिंताजनक है।'

मृतकों और घायलों के परिजनों को मुआवजा

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार लाख रुपये तथा प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये की राशि देने की घोषणा की है। आग लगने के बाद राजकोट के पुलिस आयुक्त राजू भार्गव ने मीडियाकर्मियों को बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जाएगी और शहर के सभी ‘गेमिंग जोन’ को परिचालन बंद करने का संदेश जारी किया गया है।

पटेल ने ट्वीट किया, "राजकोट में आग की घटना पीड़ा देने वाली है। मैं इस घटना में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। मैं ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।" उन्होंने कहा, "राज्य सरकार मृतकों के परिवारों को चार लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देगी। यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि ऐसी घटना दोबारा न हो।"

सीएम पटेल ने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पूरी घटना की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपी गई है।

(इनपुट- एजेंसी)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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