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कैसे हुआ एयर इंडिया का प्लेन क्रैश, CCTV खोलेगा राज? हादसे के दौरान 7 से 12 सेकंड के बीच क्या हुआ!

अहमदाबाद एयरपोर्ट के करीब टेक ऑफ के बाद क्रैश हुए एयर इंडिया के विमान हादसे में 241 लोगों की मौत हो गई। हादसे के कारणों को लेकर तमाम सुगबुगाहट है कि आखिर क्या वजह रही कि प्लेन एक मिनट के अंदर ही टेक ऑफ करने के बाद क्रैश हो गया।

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विमान 27 सेकेंड तक हवा में रहा

नई दिल्ली: अहमदाबाद एयरपोर्ट के करीब टेक ऑफ के बाद क्रैश हुए एयर इंडिया के विमान हादसे में अबतक 265 लोगों की मौत हो गई। हादसे के कारणों को लेकर तमाम सुगबुगाहट है कि आखिर क्या वजह रही कि प्लेन एक मिनट के अंदर ही टेक ऑफ करने के बाद क्रैश हो गया। एयर इंडिया का लंदन जा रहा विमान गुरुवार दोपहर अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद यहां एक मेडिकल कॉलेज परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में दो पायलट और चालक दल के 10 सदस्य सहित 242 लोग सवार थे जिसमें चमत्कारिक रुप से एक सवार विश्वास कुमार रमेश बाल बाल बच गए।

एयर इंडिया के विमान हादसे की डीजीसीए जांच हवाई अड्डे के परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज पर केंद्रित रहने वाली है, क्योंकि इससे विमान के अंतिम क्षणों का महत्वपूर्ण घटनाक्रम पता चलता है। क्योंकि विमान टेक ऑफ और क्रैश में एक मिनट से भी कम का अंतर बताया जा रहा है।

एयर इंडिया विमान हादसा

एयर इंडिया विमान हादसा

विमान 27 सेकंड तक हवा में रहा

सूत्रों के मुताबिक विमान लगभग 27 सेकंड तक हवा में रहा। टेकऑफ़ सामान्य और स्थिर लग रहा था। लिहाजा यह जांच का बड़ा विषय होगा कि आखिर टेकऑफ के एक मिनट के अंदर ही ऐसा क्या हुआ कि विमान जमीन पर गिरकर हादसे का शिकार हो गया।

7 से 12 सेकंड के बीच क्या हुआ

यह महत्वपूर्ण अवधि जांच के दायरे में हो सकता है। जिस हिसाब से प्लेन तेजी से और काफी कम वक्त में नीचे गिरा उससे लगता है कि टेकऑफ़ के बाद कुछ गड़बड़ हुई। 8 सेकंड के बाद विमान नीचे गिरता हुआ दिख रहा है जिससे नियंत्रण खोने या सिस्टम में खराबी का संकेत मिलता है।

एयर इंडिया विमान हादसा

एयर इंडिया विमान हादसा

डीजीसीए जांच के दौरान मुख्य रूप से इन तथ्यों पर गौर कर सकता है

  • सीसीटीवी फुटेज को फ़्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) इनपुट के साथ कनेक्ट करना।
  • प्रारंभिक टेक ऑफ के दौरान संभावित मुद्दों का विश्लेषण करना, जैसे: पक्षी का टकराना, इंजन की विफलता, थ्रस्ट में कमी, पायलट इनपुट त्रुटियां या मैकेनिकल या सॉफ्टवेयर की खराबी
  • जांच दल टेकऑफ़ क्रम के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) रिकॉर्डिंग और कम्यूनिकेशन लॉग की समीक्षा
  • रखरखाव इतिहास और प्री-फ़्लाइट निरीक्षण रिपोर्ट की जांच करना।
  • 27 सेकंड की छोटी अवधि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण होगी।

क्या है जानकारों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि अहमदाबाद से लंदन जा रहे एअर इंडिया के विमान के हादसे का शिकार होने का संभावित कारण दोनों इंजनों का फेल होना या उड़ान भरने के तुरंत बाद पक्षी का टकरा जाना हो सकता है। बड़े विमानों के तीन वरिष्ठ पायलट के मुताबिक इस दुर्घटना के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो को देखने से ऐसा लगता है कि इंजन उड़ान भरने के लिए आवश्यक गतिबल (थ्रस्ट) नहीं जुटा पाए, जिसके परिणामस्वरूप उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही आवासीय क्षेत्र में भीषण दुर्घटना हो गई। अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने वाले बोइंग 787-8 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के विशिष्ट कारणों का पता विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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