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क्या है कोरोना का JN.1 वैरिएंट: कितना खतरनाक और क्या लगवानी होगी एक और बूस्टर डोज? यहां समझिए सबकुछ

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 20, 2023, 11:38 AM IST

Corona New Variant JN. 1: कोरोना का यह नया वैरिएंट JN.1 कितना खतरनाक है? यह अन्य वैरिएंट से कितना अलग है? JN.1 वैरिएंट कैसे हमारी इम्यूनिटी को चकमा दे रहा है? इससे कैसे बचा जा सकता है? और क्या हमें एक और बूस्टर खुराक की जरूरत है? आइए जानते हैं...

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कोरोना का नया वैरिएंट

Photo : BCCL

Corona New Variant JN. 1: भारत में कोरोना के नए वैरिएंट ने एक बार फिर सरकार की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हाल ही में केरल में कोरोना के JN.1 वैरिएंट का पता चला है। 78 साल की एक महिला की जांच में इस वैरिएंट की पुष्टि हुई, इसके अलावा तमिलनाडु में भी एक व्यक्ति में यह वैरिएंट पाया गया है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों में यह वैरिएंट तेजी से अपने पैर पसार रहा है। सिंगापुर में एक सप्ताह के भीतर ही इस वैरिएंट के 56 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना का नया वैरिएंट विकसित हो रहा है और यह खुद को लगातार बदल रहा है। WHO ने कहा है कि इसके स्पाइक प्रोटीन में सिर्फ एक अतिरिक्त म्यूटेशन है।

इस बीच, केरल में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। केरल में सोमवार को कोविड-19 के 111 नए मामले सामने आए, जिसके बाद राज्य में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या बढ़कर 1634 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में सोमवार को 127 नए मामले सामने आए, जिसमें अकेले 111 केस केरल के हैं। वहीं पिछले 24 घंटे में केरल में कोविड-19 से एक मरीज की मौत भी हो गई। इसी के साथ गत तीन साल में कोरोना वायरस से राज्य में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 72,053 हो गई। ऐसे में सरकार ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी की है और सतर्क रहने को कहा है।

आइए जानते हैं कोरोना का यह नया वैरिएंट JN.1 कितना खतरनाक है? यह अन्य वैरिएंट से कितना अलग है? JN.1 वैरिएंट कैसे हमारी इम्यूनिटी को चकमा दे रहा है? इससे कैसे बचा जा सकता है? और क्या हमें एक और बूस्टर खुराक की जरूरत है...

पहले जानिए JN.1 वैरिएंट क्या है?

कोरोना का JN.1 वैरिएंट BA.2.86 वैरिएंट का वंशज है, जिसे आमतौर पर पिरोला कहा जाता है और यह बिल्कुल नया नहीं है। इस वैरिएंट का पहला मामला सितंबर में संयुक्त राज्य अमेरिका में पाया गया था और वैश्विक स्तर पर पहला मामला इस साल जनवरी की शुरुआत में पाया गया था। जबकि जेएन.1 में पिरोला की तुलना में स्पाइक प्रोटीन पर केवल एक अतिरिक्त म्यूटेशन होता है। जबकि पिरोला में स्पाइक प्रोटीन पर 30 से अधिक म्यूटेशन होते हैं। Sars-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन पर म्यूटेशन मायने रखता है क्योंकि वे मानव कोशिका पर रिसेप्टर्स से जुड़ते हैं और वायरस को उसमें प्रवेश करने की अनुमति देते हैं।

कितना खतरनाक है नया वैरिएंट?

कोरोना के इस नए वैरिएंट को अन्य वैरिएंट के मुकाबले फिलहाल खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि यह नया सब-वैरिएंट हमारे इम्यून सिस्टम को चकमा देने में माहिर है। इसके अलावा इसके लक्षण भी पिछले वैरिएंट जैसे ही हैं। संक्रमित व्यक्ति को खुराक, बहती नाक, गले में खराश, सिरदर्द और दस्त जैसे लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, इस वैरिएंट के कारण अत्यधिक गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने में वृद्धि के मामले बेहद कम हैं।

क्यों हैं चिंता का कारण?

वैश्विक स्तर पर पिरोला और इसके वंशज जेएन.1 के कारण होने वाले मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। संयुक्त राज्य अमेरिका, सिंगापुर और चीन में मामलों का पता चला है। WHO के एक बयान में कहा गया है कि वैश्विक डेटाबेस ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इन्फ्लुएंजा डेटा (GISAID) पर अपलोड किए गए Sars-CoV-2 अनुक्रमों में पिरोला और उसके वंशजों की हिस्सेदारी 17% है। दिसंबर की शुरुआत तक, इनमें से आधे से अधिक अनुक्रम JN.1 के थे। संयुक्त राज्य अमेरिका में कोविड-19 वैरिएंट में JN.1 की हिस्सेदारी 15% से 29% है।

क्या एक और बूस्टर की जरूरत है?

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, सिंगापुर के आंकड़ों से पता चलता है कि जिन लोगों ने अपनी आखिरी कोविड-19 वैक्सीन की खुराक एक साल से अधिक पहले ली थी, उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता 1.6 गुना अधिक थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि फिलहाल इस वैरिएंट से अस्पताल में भर्ती होने या जान के जोखिम का खतरा कम है। शुरुआती दिनों में मरीज में लक्षण नजर आते हैं और वह धीरे-धीरे ठीक होता जाता है। अगर मरीज ठीक नहीं हो रहा है तो डरने की जरूरत नहीं है और स्ट्रेन कमजोर होता चला जा रहा है। ऐसे में अतिरिक्त बूस्टर खुराक की जरूरत नहीं है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस वैरिएंट पर काम कर रहे हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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