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कौन करेगा हाथरस भगदड़ कांड की न्यायिक जांच? रिटायर्ड जस्टिस बृजेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में 3 सदस्यीय आयोग का हुआ गठन

Hathras Stampede: हाथरस हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन कर दिया गया है। हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बृजेश कुमार श्रीवास्तव न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष होंगे। इसके लिए राजपाल ने नोटिफिकेशन जारी किया है। आयोग में रिटायर्ड आईएएस हेमंत राव और रिटायर्ड आईपीएस भवेश कुमार सिंह को सदस्य नियुक्त किया गया।

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तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग में कौन-कौन शामिल?

Judicial Inquiry Commission for Hathras Case: हाथरस में हुए हादसे की न्यायिक जांच के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बृजेश कुमार श्रीवास्तव (द्वितीय) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया गया है। प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल द्वारा बुधवार रात इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।

तीन सदस्यीय आयोग में कौन-कौन शामिल?

इस न्यायिक जांच आयोग में रिटायर्ड आईएएस हेमंत राव और रिटायर्ड आईपीएस भवेश कुमार सिंह को सदस्य नियुक्त किया गया है। न्यायिक जांच आयोग का मुख्यालय लखनऊ में होगा। आयोग इस नोटिफिकेशन के जारी होने की तारीख से दो माह की अवधि के भीतर जांच पूरी करेगा। इसकी अवधि में किसी प्रकार का परिवर्तन राज्य सरकार के आदेश पर किया जा सकेगा।

राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा आयोग

नोटिफिकेशन के अनुसार आयोग 2 जुलाई, 2024 को हाथरस जनपद में घटित घटना की जांच करेगा और जांच के बाद निर्धारित बिंदुओं पर राज्य सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। इसमें, कार्यक्रम के आयोजकों द्वारा, जिला प्रशासन द्वारा प्रदान की गई अनुमति एवं उसमें दी गई शर्तों के अनुपालन की जांच करना शामिल है। साथ ही, यह घटना कोई दुर्घटना है अथवा कोई षडयंत्र या अन्य कोई सुनियोजित आपराधिक घटना की सम्भावना के पहलुओं की जांच करना।

Hathras judicial inquiry commission.

न्यायिक जांच आयोग का हुआ गठन।

इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा कार्यक्रम के दौरान भीड़ नियंत्रण तथा कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए प्रबंध एवं उनसे संबंधित अन्य पहलुओं की जांच करना भी आयोग के कार्यक्षेत्र में होगा। आयोग उन कारणों एवं परिस्थितियों पर भी गौर करेगा जिसके कारण घटना घटित हुई, जबकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के संबंंध में आयोग अपने सुझाव भी देगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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