हरिवंश नारायम सिंह, एक बार फिर राज्यसभा उपसभापति चुने गए। बीते हफ्ते ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा सांसद के लिए मनोनीत किया था। पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद सीट खाली हुई थी। इसे भरने के लिए जदयू के हरिवंश को चुना गया। 69 साल के हरिवंश 2032 तक राज्यसभा में रहेंगे।
राज्यसभा (Rajya Sabha) के डिप्टी चेयरमैन चुने जाने पर पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा- हरिवंश राय जी को राज्यसभा उपसभापति बने जाने पर मेरी बधाई। मुझे उम्मीद है कि सदन को हरिवंश जी के अनुभव का लाभ मिलेगा। सदन के गरिमा को नई ऊंचाई प्रदान की जाएगी।
एक सहज कार्यशैली का सम्मान है: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, " राज्यसभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना ये अपने आप में इस सदन का आपके प्रति जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का जो सदन को लाभ मिला है सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है उसको एक प्रकार से सदन ने आज एक मोहर लगा दी है।"
पीएम मोदी ने कहा कि ये अपने आप में ये एक अनुभव का सम्मान है। एक सहज कार्यशैली का सम्मान है और एक सहज कार्यशैली की स्वीकृति भी है. हमने सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए देखा है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने दी बधाई
हरिवंश नारायण सिंह तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आप राज्यसभा के उपसभापति बनने के लिए पहले नामित सदस्य हैं। आप आप राज्यसभा के उपसभापति बनने के लिए पहले नामित सदस्य हैं। आप इस पद के पूरी तरह हकदार हैं।हरिवंश नारायण सिंह से जुड़ी कुछ अहम जानकारी
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ। उनका पैतृक जुड़ाव सारण के सिताब दियारा गांव से है, जो लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की जन्मस्थली भी है।
उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से अर्थशास्त्र में एम.ए. और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। छात्र जीवन में वे जेपी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचारों से बेहद प्रभावित रहे और 1974 के जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
राजनीति में आने से पहले वे एक प्रतिष्ठित पत्रकार और बैंक अधिकारी रहे। उन्होंने मात्र 500 रुपये के वेतन पर पत्रकारिता की शुरुआत की। 1977 में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में करियर शुरू किया और बाद में मुंबई में प्रसिद्ध पत्रिका 'धर्मयुग' (1981 तक) के साथ काम किया। 1981 से 1984 के बीच उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया में एक अधिकारी के रूप में भी सेवाएं दीं।
उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण दौर रांची में एक प्रमुख अखबार के संपादक के रूप में बीता, जहां उन्होंने लगभग 25 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त मीडिया सलाहकार के रूप में भी कार्य किया।
राजनीति में कैसे हुई एंट्री?
हरिवंश जी का राजनीति में आना किसी फिल्मी पटकथा की तरह अचानक था। 2014 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें चौंकाते हुए जेडीयू की ओर से राज्यसभा के लिए नामित किया।
