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Gujarat: मरा मानकर जिसका किया अंतिम संस्कार वह निकला जिंदा, शोक सभा में पहुंचा तो उड़ गए होश

Gujarat News: मेहसाणा जिले के वीजापुर की प्रभुनगर सोसायटी में रहने वाला बृजेश सुथार 27 अक्टूबर को गायब हो गया था। कुछ दिन बाद एक शव मिला, जिसकी पहचान बृजेश के रूप में हुई। परिवार ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। हालांकि, 15 नवंबर को वह अपने घर पहुंच गया।

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Gujarat News: गुजरात के मेहसाणा से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां जिस व्यक्ति को मरा मानकर परिवार ने अंतिम संस्कार किया, वह जिंदा निकला। परिवार ने मृतक की याद में शोकसभा का भी आयोजन किया। हालांकि, शोकसभा वाले दिन कथित तौर पर मृतक व्यक्ति घर पर पहुंच गया, यह देख सभी के होश उड़ गए। अब इस घटना की चर्चा चारों ओर है।

मामला मेहसाणा जिले के वीजापुर का है। यहां प्रभुनगर सोसायटी में रहने वाला एक युवक 27 अक्टूबर को गायब हो गया था। वह परिवार को बिना बताए घर छोड़ कर निकल गया था, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। जानकारी के मुताबिक युवक अहमदाबाद में शेयर बाजार के व्यवसाय से जुड़ा हुआ था और टेंशन में रहता था। गुम होने के बाद परिवार ने अहमदाबाद के नरोड़ा पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत तक दर्ज कराई थी।

ब्रिज के पास मिला शव

गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज किए जाने के कुछ दिन बाद साबरमती पुलिस को ब्रिज के पास एक शव बरामद हुआ। उसकी पहचान बृजेश उर्फ पिंटू सुथार के तौर पर हुई थी। परिवार ने भी उस मृतदेह को अपने बच्चे बृजेश की मान लिया और अंतिम संस्कार तक कर दिया गया। बृजेश सुथार की याद में परिवार ने 14 नवंबर को शोक सभा का आयोजन तक कर दिया। हालांकि, अचानक से गुम हुआ बृजेश सुथार अपने घर पहुंच गया, जिसके बाद पूरा परिवार और सोसायटी के सभी लोग दंग रह गए। अब सबके सामने सवाल यह खड़ा हुआ है कि आखिरकार अंतिम संस्कार किसका किया गया था? जिसके बाद परिवार ने फिर एक बार पुलिस का संपर्क किया है। अब पुलिस जांच में जुटी है कि मेहसाणा के सुथार परिवार ने जिस बृजेश उर्फ पिंटू का अंतिम संस्कार किया वह कौन है?

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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