बजट सत्र से पहले इस दिन होगी सर्वदलीय बैठक; लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 24, 2026, 04:23 PM IST
28 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र से पहले 27 जनवरी को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में केंद्र सरकार अन्य राजनीतिक दलों के साथ विधायी और अन्य एजेंडों पर चर्चा की जाएगी।
संसद।
आगामी 28 जनवरी से संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के साथ ही इस सत्र की औपचारिक शुरुआत होगी। इससे पहले 27 जनवरी को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में केंद्र सरकार अन्य राजनीतिक दलों के साथ विधायी और अन्य एजेंडों पर चर्चा करेगी। केंद्रीय बजट ऐसे समय में पेश किया जाएगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को उलट-पुलट कर दिया है।
11 बजे होगी बैठक
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बारे में जानकारी दी है। उनके हवाले से एक सरकारी सूत्र ने बताया कि सर्वदलीय बैठक 27 जनवरी को सुबह 11 बजे संसद भवन के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की जाएगी। बजट सत्र 28 फरवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा। इसके बाद दोबारा संसद 9 मार्च को फिर से एकत्रित होगी। एक फरवरी को लगातार नौवीं बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। लोकसभा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए अस्थायी रूप से तीन दिन 2 से 4 फरवरी, आवंटित किए हैं। वहीं, 28 जनवरी और 1 फरवरी को शून्यकाल नहीं होगा।
लोकसभा में नौ विधेयक लंबित
इस बजट सत्र के दौरान लोकसभा के समक्ष नौ विधेयक लंबित हैं, जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025; प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025; और संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक, 2024 शामिल हैं। इन विधेयकों की वर्तमान में संसदीय स्थायी या चयन समितियों द्वारा जांच की जा रही है।
मनरेगा पर सियासी राह हो सकती है तेज
यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी कांग्रेस, विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम के खिलाफ देशव्यापी अभियान चला रही है, जो यूपीए युग के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का स्थान लेता है। इस बीच, सत्ताधारी भाजपा नए कानून को सुधारवादी और पुराने कानून की खामियों को दूर करने के लिए आवश्यक बताकर एक जवाबी अभियान चला रही है।
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