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गोगामेड़ी हत्याकांड: आखिर आरोपियों तक कैसे पहुंची क्राइम ब्रांच, पिछले 72 घंटों में क्या-क्या हुआ?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 10, 2023, 02:07 PM IST

Gogamedi Shooters Arrested: सुखदेव गोगामेड़ी की हत्या के बाद दोनों शूटरों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बस और ट्रेन का सहारा लिया। आइए आपको बताते हैं कि गोगामेड़ी के शूटरों तक पुलिस कैसे पहुंची? और बीते 72 घंटों में क्या-क्या हुआ?

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सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड

Photo : BCCL

Gogamedi Shooters Arrested: राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में देर रात बड़ा डेवलपमेंट हुआ। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर हत्याकांड में शामिल दो शूटरों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। राजस्थान के जयपुर निवासी रोहित राठौड़ और हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी नितिन फौजी को चंडीगढ़ के सेक्टर 22 से गिरफ्तार किया है। वहीं एक अन्य सहयोगी उधम सिंह को भी गिरफ्तार किया है।

आइए आपको बताते हैं कि गोगामेड़ी के शूटरों तक पुलिस कैसे पहुंची? और बीते 72 घंटों में क्या-क्या हुआ? जानते हैं...

72 घंटों से शूटरों की गतिविधियों पर रखी जा रही थी नजर

अधिकारियों के मुताबिक, राजस्थान पुलिस से संपर्क करने के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पिछले 72 घंटों से शूटरों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। पुलिस ने बताया कि 5 दिसंबर को गोगामेड़ी की हत्या करने के बाद देनों शूटरों ने राजस्थान के डीडवाना के लिए टैक्सी ली थी और वहां से वे दिल्ली के लिए बस में सवार हुए थे। दोनों शूटरों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए ट्रेन और टैक्सी का इस्तेमाल किया था।

धारूहेड़ा से हरियाणा के लिए ट्रेन में हुए सवार

दिल्ली पुलिस की जांच में पता चला कि दोनों शूटर धारूहेड़ा (हरियाणा) में बस से उतरे थे। उन्होंने धारूहेड़ा से रेवाड़ी रेलवे स्टेशन तक एक ऑटो-रिक्शा लिया, फिर हिसार (हरियाणा) के लिए ट्रेन में चढ़ गए। सुबह हिसार पहुंचने पर, उन्होंने उधम से संपर्क किया, जिसने उनके लिए एक टैक्सी की व्यवस्था की। इसके बाद, हिसार से तीनों ने हिमाचल प्रदेश के मनाली की यात्रा की। शनिवार को उनके चंडीगढ़ लौटने पर वहां तैनात एक टीम ने उन्हें पकड़ लिया।

देर रात छापेमारी के बाद हुई गिरफ्तारी

अधिकारी ने बताया कि डीसीपी अमित गोयल की देखरेख में एक टीम ने राजस्थान पुलिस के साथ सहयोग किया और चंडीगढ़ के सेक्टर 22 के एक होटल में देर रात छापेमारी के दौरान टीम ने उधम सिंह के साथ दो शूटर रोहित और नितिन को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। बता दें, 5 दिसंबर को जयपुर के श्याम नगर इलाके में दो हमलावरों ने गोगामेड़ी के घर में घुसकर उन पर गोलियां चला दीं। उन्हें मानसरोवर के मेट्रो मास अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके समर्थक तभी से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। बुधवार शाम को गोगामेड़ी की पत्नी शिला शेखावत ने विरोध स्थल पर एक संबोधन में कहा, मेरी मांग है कि जब तक आरोपियों को हमारे सामने नहीं लाया जाता तब तक विरोध जारी रहेगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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