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क्या महाराष्ट्र से विधानसभा चुनाव लड़ेगा गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई? इस पार्टी से मिला ऑफर

Gangster Lawrence Bishnoi: उत्तर भारतीय विकास सेना पार्टी के अध्यक्ष सुनील शुक्ला ने पत्र में लॉरेंस बिश्नोई की तुलना शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह से की है। उन्होंने कहा है कि लॉरेंस बिश्नोई को चुनाव जिताने के लिए उनकी पार्टी पूरा प्रयास करेगी।

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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को मिला चुनाव लड़ने का ऑफर।

Gangster Lawrence Bishnoi: गुजरात की साबरमी जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऑफर मिला है। गैागस्टर को यह ऑफर महाराष्ट्र के राजनीतिक दल उत्तर भारतीय विकास सेना पार्टी की ओर से दिया गया है। इतना ही नहीं पार्टी अध्यक्ष सुनील शुक्ला ने लॉरेंस बिश्नोई की तुलना शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह से की है। इस बाबत उन्होंने एक पत्र भी लिखा है।

उत्तर भारतीय विकास सेना पार्टी के अध्यक्ष सुनील शुक्ला ने पत्र में लॉरेंस बिश्नोई की प्रशंसा करते हुए उन्हें क्रांतिकारी बताया है। विश्वास जताया कि लॉरेंस बिश्नोई के राजनीति में आने से महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। सुनील शुक्ला ने पत्र में लिखा, हमारा प्रस्ताव है कि आप महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ें। उत्तर भारतीय विकास सेना के कार्यकर्ता और पदाधिकारी आपके अभियान का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। हम बस आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

लॉरेंस को चुनाव जिताने में कसर नहीं छोड़ेगी पार्टी

पत्र में आगे कहा गया है, हमें गर्व है कि आप (लॉरेंस बिश्नोई), पंजाब में जन्मे एक उत्तर भारतीय हैं और ऐसे मुद्दे का प्रतिनिधित्व करते हैं जो हमारी पार्टी के मूल्यों से मेल खाता है। हमारी पार्टी आपकी जीत सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। पार्टी की तरफ से लॉरेंस बिश्नोई को यह ऑफर ऐसे समय पर दिया गया है, जब हाल ही में एनसीपी नेता बाबा सिद्धीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, इस हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ही ली है। इतना ही नहीं गैंग सलमान खान को कई बार जान से मारने की धमकी तक दे चुका है।

2015 से जेल में बंद है लॉरेंस बिश्नोई

31 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब प्रसिद्धि पाई जब उसे 29 मई, 2022 को पंजाबी रैपर सिद्धू मूसेवाला की हत्या से जोड़ा गया। कांग्रेस पार्टी के सदस्य मूसेवाला की हत्या लॉरेंस बिश्नोई के सहयोगियों ने की थी। इसे गैंगवार का नतीजा बताया था। हालांकि बिश्नोई 2015 से जेल में बंद हैं, लेकिन उसका आपराधिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और अब एक राजनीतिक दल खुलेतौर पर उसे राजनीति के मैदान में उतरने के लिए राजी कर रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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