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'हमारे परिवार, पुरखों की बनाई हुई है', संभल की 150 साल पुरानी बावड़ी पर पूर्व सांसद ने जताया मालिकाना हक

Sambhal Stepwell: 150 साल पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी की खुदाई का काम जारी है। इस बीच मुरादाबाद के पूर्व सांसद चंद्र विजय सिंह ने बावड़ी पर मालिकाना हक जताया है। पूर्व सांसद ने कहा कि बावड़ी पर भिन्न-भिन्न लोग दावा कर रहे हैं और कुछ उस पर काबिज हैं। मैं ये साफ करना चाहता हूं कि बावड़ी और वो भूमि हमारे परिवार, पुरखों की बनाई हुई है और परिवार की संपत्ति है।

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150 साल पुरानी बावड़ी पर पूर्व सांसद ने जताया मालिकाना हक

Photo : ANI

संभल जिले के चंदौसी में मिली 150 साल पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी की खुदाई का काम जारी है। इस बीच मुरादाबाद के पूर्व सांसद चंद्र विजय सिंह ने बावड़ी पर मालिकाना हक जताया है। चंद्र विजय सिंह ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कौशल ने प्रशासन को बताया था कि चंदौसी में एक प्राचीन बावड़ी मिट्टी से दबी हुई है। प्रशासन ने उसको खोदना शुरू किया। बावड़ी उत्तर प्रदेश में एक अनोखी चीज है, क्योंकि इसका रिवाज अधिकांशत: राजस्थान, गुजरात आदि में होता है। जब खुदाई शुरू हुई तो पता चला कि वो तीन मंजिल जमीन के नीचे है।

बावड़ी हमारे परिवार और पुरखों की बनाई हुई है- पूर्व सांसद चंद्र विजय सिंह

पूर्व सांसद ने कहा कि बावड़ी पर भिन्न-भिन्न लोग दावा कर रहे हैं और कुछ उस पर काबिज हैं। मैं ये साफ करना चाहता हूं कि बावड़ी और वो भूमि हमारे परिवार, पुरखों की बनाई हुई है और परिवार की संपत्ति है। अब कौन उस पर काबिज है, कब से हुआ, ये हमें मालूम नहीं है, क्योंकि हम लोग छोटे थे। लेकिन यह हमारी अनुमति के अनुसार नहीं हुआ है। मैं और मेरा परिवार यही चाहेगा कि ये एक धरोहर है चंदौसी के लिए, हम चाहते हैं कि इसे या तो पुरातत्व विभाग ले या प्रदेश का पर्यटन विभाग ले। हालांकि, पुरातत्व विभाग इसका सर्वे कर रहा है। यह एक अच्छा अवसर हो सकता है यदि चंदौसी को एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी इसके लिए प्रशासन से बात नहीं हुई है। परंतु अगर प्रशासन चाहेगा तो हम लिख के देने को तैयार हैं। हमने अपने बुजुर्गों से सुना था कि 1700 ईसवी के आसपास ये बावड़ी बनी थी। 1898 के करीब हमारे दादा के दादा राजा कृष्ण कुमार सिंह ने इसी स्थान पर एक निवास बनाया था। जिसके प्रांगण में ये बावड़ी आती है। राजा कृष्ण कुमार सिंह का जन्म 1848 में हुआ और उनकी मृत्यु 1915 में हुई थी। उसका नाम था कृष्ण निवास। वो आज तक शायद खड़ा हुआ है, लेक‍िन किसके कब्जे है, हमें यह मालूम नहीं है।

आम जनता के लिए बने पर्यटन का स्थान- पूर्व सांसद चंद्र विजय सिंह

प्रशासन आपसे दस्तावेज की मांग करते है तो उन्हें मुहैया कराएंगे। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दस्तावेज प्रशासन के पास होंगे। सब पुराने दस्तावेज तो प्रशासन के पास हैं। हम चाहते हैं कि वहां आम जनता के लिए पर्यटन का एक आकर्षक स्थान बने। चंदौसी और आसपास कोई ऐसी बावड़ी नहीं है। अच्छा रहेगा, वहां के लिए एक ऐसी प्राचीन चीज सुरक्षित रहे, और वहां की जनता के काम में आए। बता दें कि संभल के करीब चंदौसी में मिली 150 साल पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी की खुदाई का काम जारी है। दूसरी बार एएसआई की टीम सर्वे के लिए यहां पहुंची। पहली मंजिल तक खुदाई हो चुकी है। बड़ी तादाद में मजदूरों को लगाया गया है।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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