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Andhra Pradesh: पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ "हत्या के प्रयास" का केस दर्ज, जानें क्या है विवाद

YS Jagan Mohan Reddy: पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ "हत्या के प्रयास" (attempt to murder) का मामला दर्ज हुआ है, ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती है। आपको बताते हैं कि आखिर वो विवाद क्या है, जिसमें उनके खिलाफ पुलिस ने एक्शन लिया है।

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वाईएस जगन मोहन रेड्डी, पूर्व मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश।

Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पूर्व सीएम के खिलाफ पुलिस ने हत्या की कोशिश (Attempt to Murder) का केस दर्ज किया है। जगन के साथ-साथ इस मामले में दो आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ भी मामजा दर्ज हुआ है। आपको बताते हैं कि आखिर वो कौन सा मामला है, जिसमें वो फंसते नजर आ रहे हैं।

दो आईपीएस अधिकारियों पर भी मामला दर्ज

पुलिस ने इस एक्शन की जानकारी साझा करते हुए ये बताया है कि आंध्र के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दो अधिकारियों तत्कालीन सीआईडी चीफ पीवी सुनील कुमार और उनके खुफिया प्रमुख पीएसआर अंजनेयुलु के खिलाफ ‘हत्या के प्रयास’ का मामला दर्ज किया गया है है।

पुलिस ने विधायक की शिकायत पर लिया एक्शन

विधायक रघुराम कृष्णम राजू की शिकायत के आधार पर आंध्र प्रदेश की गुंटूर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। जिसमें विधायक ने ये आरोप लगाया था कि उन्हें सीआईडी कार्यालय (CID Office) में बेल्ट और लाठी से पीटा गया।

विधायक रघुराम कृष्णम राजू ने कही ये बात

विधायक राजू ने ये बताया कि वर्ष 2021 में सीआईडी अधिकारियों ने हैदराबाद से उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया और ट्रांजिट अरेस्ट वारंट भी नहीं लिया। रघुराम कृष्णम ने आगे बताया कि उन्हें सीआईडी कार्यालय (CID Office) में स्थानांतरित कर दिया गया और वहां उनके साथ मारपीट की गई। विधायक ने आरोप लगाया कि पीवी सुनील कुमार (PV Sunil Kumar) के साथ कई पुलिस अधिकारी सीआईडी कार्यालय में पहुंचे और लाठी से उनकी पिटाई की।

पूर्व सीएम सीएम जगन मोहन रेड्डी पर आरोप

रघुराम कृष्णम राजू ने ये भी आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी (YS Jagan Mohan Reddy) के दबाव के चलते उन्हें दिल की बीमारी से संबंधित दवा लेने की इजाजत तक नहीं दी गई। विधायक ने दावा किया कि पूर्व सीएम रेड्डी को ये जानकारी थी कि उनके दिल की बाईपास सर्जरी हुई, लेकिन फिर भी कुछ लोग उनकी छाती पर बैठ गए।

उन्होंने ये भी दावा किया कि उनका फोन छीन लिया गया और पासवर्ड नहीं बताने पर उन्हें पीटा गया। पुलिस अधिकारियों के कहने पर सरकारी अस्पताल में इलाज करने वाली डॉक्टर प्रभावती ने झूठे मेडिकल प्रमाण पत्र जारी किए। राजू ने ये भी आरोप लगाया कि पीवी सुनील कुमार ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और वाईएस जगन मोहन रेड्डी की आलोचना न करने की हिदायत दी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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