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Kisan Andolan: सांसदों के आवास के बाहर धरना देंगे किसान, करेंगे भूख हड़ताल

एक तरफ पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली की ओर पैदल मार्च कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, पानी की बौछार की। वहीं दूसरी ओर किसान नेता ने ऐलान किया है कि कृषक समुदाय पंजाब को छोड़ देशभर में सांसदों के आवास के बाहर सुबह से शाम तक धरना देगा।

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किसानों ने विरोध के लिए बनाया नया प्लान।

Farmers Protest: किसान नेता अभिमन्यु कोहाड ने रविवार को यहां कहा कि सोमवार को कृषक समुदाय पंजाब को छोड़ देशभर में सांसदों के आवास के बाहर सुबह से शाम तक धरना देगा। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं और वे दिल्ली कूच करना चाह रहे हैं। इसके अलावा किसान नेता जगजीत सिह दल्लेवाल दो हफ्ते से आमरण अनशन पर बैठे हैं।

सांसदों के आवास के बाहर धरना देंगे किसान

कोहाड ने कहा कि किसान आंदोलन को तीन सौ दिन पूरे हो रहे हैं तथा दल्लेवाल के अनशन को भी 14 दिन हो रहे हैं और इसलिए पंजाब को छोड़ देश में अन्य स्थानों पर किसान सोमवार को सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक सांसदों के आवास के बाहर धरना देंगे और भूख हड़ताल करेंगे। वहीं, अधिकारियों ने बताया कि जिले में दातासिंह वाला बॉर्डर पर चौथे दिन रविवार भी शांति बनी रही तथा वहां तैनात अर्धसैनिक बल तथा पुलिस बल चौकस रहा।

2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा से जुड़ा है मामला

किसान एमएसपी के अलावा कर्ज माफी, किसानों एवं खेत मजदूरों के लिए पेंशन और बिजली दरों में बढ़ोतरी न करने की मांग कर रहे हैं। किसान 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘‘न्याय’’, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की भी मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों पर छोड़े गए आंसू गैस के गोले

इसके अळावा पंजाब से लगती हरियाणा की सीमा पर हरियाणा के सुरक्षाकर्मियों द्वारा आंसू गैस के गोले दागे जाने से कुछ किसानों के घायल होने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने रविवार दोपहर को दिल्ली की ओर पैदल मार्च स्थगित कर दिया। किसान नेताओं ने कहा कि वे सोमवार को अगली रणनीति तय करेंगे। पंजाब-हरियाणा सीमा पर 101 किसानों के एक जत्थे ने रविवार को शंभू विरोध स्थल से दिल्ली के लिए अपना पैदल मार्च फिर से शुरू किया लेकिन हरियाणा के सुरक्षाकर्मियों की ओर से लगाए गए बहुस्तरीय अवरोधकों के कारण वे आगे नहीं बढ़ सके। हालांकि, हरियाणा के सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को चाय और बिस्कुट देकर और उन पर फूल बरसाकर उन्हें आश्चर्यचकित भी कर दिया।

वहीं, प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि यह सब एक ‘‘नाटक’’ था, क्योंकि जब वे शंभू बॉर्डर पार करने पर अड़े तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार छोड़ी। प्रदर्शनकारी किसानों के अवरोधकों के पास पहुंचने पर उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पानी की बौछारें की गईं। अंबाला पुलिस ने पहले कहा था कि किसान संगठन राष्ट्रीय राजधानी प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद ही दिल्ली की ओर मार्च कर सकते हैं।

किसानों ने एक दिन के लिए मार्च स्थगित कर दिया

‘मरजीवरा’ (किसी उद्देश्य के लिए मरने को तैयार व्यक्ति) नामक यह समूह फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों के लिए मार्च कर रहा था लेकिन उन्हें कुछ मीटर दूर ही रोक दिया गया तथा तीन घंटे से अधिक समय तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध के बाद किसानों ने एक दिन के लिए मार्च स्थगित कर दिया। पंजाब के किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने शाम को कहा कि कम से कम छह किसान घायल हो गए और उनमें से एक को चंडीगढ़ के स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में ले जाया गया है।

सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सोमवार को किसान अपने मंचों - संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा-की बैठक के बाद अपनी अगली कार्रवाई का फैसला करेंगे। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने जत्थे (101 किसानों का समूह) को वापस बुला लिया है।’’ पंधेर ने किसानों के खिलाफ आंसूगैस के इस्तेमाल की निंदा करते हुए कहा, ‘‘आज जो कुछ भी हुआ, उसे पूरे देश ने देखा।’’

आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलाने का आरोप

उन्होंने दावा किया, ‘‘(हरियाणा) प्रशासन ने बिस्किट, लंगर, फूलों की पंखुड़ियां बरसाने जैसे हथकंडे अपनाए। फूल बरसाने के तुरंत बाद, उन्होंने (हरियाणा के सुरक्षाकर्मियों ने) किसानों पर आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलाईं।’’ प्रदर्शनकारी किसान केंद्र पर दबाव बना रहे हैं कि वह उनके मुद्दों को सुलझाने के लिए उनसे बातचीत शुरू करे। शुक्रवार को भी किसानों को अपना मार्च स्थगित करना पड़ा था, क्योंकि उनमें से कुछ आंसू गैस के गोले लगने से घायल हो गए थे। रविवार को जत्थे का नेतृत्व करने वाले किसान नेता बलदेव सिंह जीरा ने कहा, ‘‘यह हरियाणा पुलिस का नाटक था। चाय और बिस्कुट के साथ-साथ उन्होंने आंसू गैस के गोले भी दागे। उनकी पोल खुल गई है।’’ पंधेर ने कहा कि घायल हुए किसानों में रेशम सिंह, दिलबाग सिंह, मेजर सिंह और हरभजन सिंह शामिल हैं।

उन्होंने दावा किया कि पंजाब पुलिस ने मीडियाकर्मियों को विरोध स्थल पर पहुंचने से रोक दिया। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस से मीडिया को विरोध स्थल से कम से कम एक किलोमीटर दूर रखने को कहा था। हरियाणा के एक सुरक्षाकर्मी को किसानों से दिल्ली तक मार्च करने का अनुमतिपत्र दिखाने की मांग करते सुना गया। सुरक्षाकर्मी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पहले हम उनकी पहचान करेंगे और देखेंगे कि उनके पास कोई अनुमति है या नहीं। हमें सूची (101 किसानों की) मिल गई है, लेकिन इनमें वे नहीं हैं जिनके नाम सूची में हैं। वे अपनी पहचान नहीं बता रहे हैं जिसका मतलब है कि वे भीड़ के रूप में आ रहे हैं।’’

पंधेर बोले- उनके विरोध प्रदर्शन का 300 वां दिन है

एक किसान ने कहा, ‘‘वे (पुलिस) कह रहे हैं कि हमारे नाम सूची में नहीं हैं। हमें नहीं पता कि उनके पास कौन सी सूची है। जब हमने उनसे पूछा कि क्या वे हमारी पहचान सत्यापित करने के बाद हमें आगे बढ़ने देंगे तो उन्होंने कहा कि हमें अनुमति दिखानी होगी।’’ टकराव बढ़ने पर सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे। आंसू गैस के गोले दागे जाने के कारण किसानों को कुछ मीटर पीछे हटना पड़ा, इनमें से कई ने अपने चेहरे ढके हुए थे और सुरक्षात्मक चश्मे पहने हुए थे। कुछ ने जूट के गीले बैग से गैस के असर से बचने का प्रयास किया। किसान नेता पंधेर ने कहा कि रविवार को उनके विरोध प्रदर्शन का 300 वां दिन है।

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। तब सुरक्षा बलों ने उनके दिल्ली कूच करने से रोक दिया था। किसान नेता तेजवीर सिंह ने प्रश्न किया कि जब किसान शांतिपूर्वक पैदल जा रहे थे तो उन्हें आगे बढ़ने से क्यों रोका गया। उन्होंने कहा, ‘‘हरियाणा को इसमें क्या आपत्ति है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘पहले केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने किसानों के ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों के साथ दिल्ली जाने पर आपत्ति जताई थी, लेकिन अब जब वे पैदल मार्च कर रहे हैं तब क्या मसला है।’’ इससे पहले हरियाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा था कि मीडियाकर्मियों की सुरक्षा के लिए उन्हें प्रदर्शन स्थल से कुछ दूरी पर रोका जाए जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी आसानी होगी।

शुक्रवार को भी किसानों को अपना मार्च स्थगित करना पड़ा था, क्योंकि उनमें से कुछ आंसू गैस के गोले लगने से घायल हो गए थे। पंधेर ने शनिवार को कहा था कि किसानों को इस मामले में केंद्र से कोई जवाब नहीं मिला है। किसान एमएसपी के अलावा कर्ज माफी, किसानों एवं खेत मजदूरों के लिए पेंशन और बिजली दरों में बढ़ोतरी न करने की मांग कर रहे हैं। किसान 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘‘न्याय’’, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की भी मांग कर रहे हैं। इस बीच, खनौरी बॉर्डर पर एक और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन जारी है, जो रविवार को 13वें दिन भी जारी रहा। किसानों का दावा है कि डल्लेवाल का वजन आठ किलो कम हो गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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