पूर्व नौसेना प्रमुख को भी SIR के तहत पहचान की पुष्टि के लिए बुलाया गया, उठ रहे सवाल, छिड़ी ऑनलाइन चर्चा
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Jan 12, 2026, 10:46 AM IST
विशेष मतदाता सूची (SIR) के दौरान 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी भूमिका के लिए वीर चक्र से सम्मानित सेवानिवृत्त एडमिरल प्रकाश को सुनवाई नोटिस जारी होने के बाद अपनी पहचान साबित करने के लिए निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
पूर्व नौसेना प्रमुख अरुण प्रकाश
भारत निर्वाचन आयोग ने नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश को नोटिस जारी कर मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए बैठक में उपस्थित होने को कहा है। सेवानिवृत्ति के बाद से गोवा में रह रहे एडमिरल प्रकाश ने कहा कि यदि एसआईआर प्रपत्रों में अपेक्षित जानकारी नहीं मिल रही है, तो उनमें संशोधन किया जाना चाहिए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका नाम 2002 में अंतिम बार अपडेट की गई मतदाता सूची में नहीं है और वे अज्ञात श्रेणी में आते हैं।
यूजर्स ने एसआईआर टीम पर उठाए सवाल
हालांकि, कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि एसआईआर टीम को और क्या चाहिए, क्योंकि पूर्व नौसेना प्रमुख का पीपीओ (पेंशन भुगतान आदेश) और जीवन प्रमाण पत्र पहले से ही सरकारी डेटाबेस में उपलब्ध हैं। दक्षिण गोवा जिला कलेक्टर और रिटर्निंग ऑफिसर एग्ना क्लीटस ने रविवार को पीटीआई को बताया कि अधिकांश मामलों में यही हो रहा है। एडमिरल प्रकाश अज्ञात श्रेणी में आते हैं। क्लीटस ने कहा कि वह सोमवार को नौसेना के पूर्व सैनिक के जनगणना प्रपत्र की जांच करेंगी। उन्होंने आगे कहा कि अधिकारी उनसे संपर्क करेंगे।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के हीरो एडमिरल प्रकाश
विशेष मतदाता सूची (SIR) के दौरान 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी भूमिका के लिए वीर चक्र से सम्मानित सेवानिवृत्त एडमिरल प्रकाश को सुनवाई नोटिस जारी होने के बाद अपनी पहचान साबित करने के लिए निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है। इस नोटिस के ऑनलाइन चर्चा का विषय बनने के बाद एडमिरल प्रकाश ने रविवार को X पर लिखा, 20 साल पहले सेवानिवृत्ति के बाद से मुझे किसी विशेष सुविधा की न तो आवश्यकता है और न ही मैंने कभी इसकी मांग की है। मैंने और मेरी पत्नी ने आवश्यकतानुसार एसआईआर फॉर्म भरे थे और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर गोवा की मतदाता सूची 2026 के मसौदे में अपना नाम देखकर हमें खुशी हुई थी। हालांकि, हम चुनाव आयोग के नोटिस का पालन करेंगे।
दंपति को 18 किलोमीटर दूर दो अलग-अलग तारीखों पर बुलाया
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा, मैं @ECIVEEP को बताना चाहता हूं कि (क) यदि एसआईआर फॉर्म में आवश्यक जानकारी नहीं है तो उन्हें संशोधित किया जाना चाहिए; (ख) बीएलओ हमसे तीन बार मिलने आया था और अतिरिक्त जानकारी मांग सकता था; (ग) हम 82/78 वर्ष के दंपत्ति हैं और हमें 18 किलोमीटर दूर दो अलग-अलग तारीखों पर उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
इस पोस्ट का जवाब देते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल टी एस आनंद (सेवानिवृत्त) ने लिखा, मेरा मानना है कि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ होगा, लेकिन अगर ऐसा नोटिस आता है तो हर नागरिक जिसके पास सभी आवश्यक दस्तावेज हैं, वह जाकर उन्हें दिखा सकता है, इसमें कोई बुराई नहीं है। इसलिए एडमिरल अरुण प्रकाश सर के मामले में उनका पीपीओ/वेटरन कार्ड ही पर्याप्त सबूत है और प्रोटोकॉल के अनुसार एसआईआर टीम उनके घर जा सकती है।
खुद को ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन मेघदूत का अनुभवी सैनिक बताने वाले एक्स यूजर @LancerFlying ने कहा- उनका, आपका और मेरा, पीपीओ और जीवन प्रमाण पत्र पहले से ही सरकारी डेटाबेस में मौजूद है। एसआईआर टीम को कीबोर्ड पर कुछ बटन दबाने और प्रमाण प्राप्त करने के अलावा और क्या चाहिए? सामान्य ज्ञान का अभाव है, यही तो गलत है।
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