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'न जाने कौन हमारे पार्टी कार्यालय में इलेक्टोरल बॉन्ड छोड़ गया', इलेक्टोरल बॉन्ड पर TMC की जेडी-यू जैसी दलील

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Mar 18, 2024, 09:53 AM IST

Electoral bond : रिपोर्टों के मुताबिक 27 मई 2019 को चुनाव आयोग को दी गई अपनी जानकारी में टीएमसी ने कहा, 'चुनावी बॉन्ड के जरिए जो चंदा मिला, उनमें से ज्यादातर बॉन्ड को हमारे पार्टी कार्यालय भेजा गया या कार्यालय के बाहर लगे ड्राप बॉक्स में किसी ने छोड़ दिया।

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इलेक्टोरल बॉन्ड पर टीएमसी की अजीब सफाई।

Photo : PTI

Electoral bond : साल 2018-19 के इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर जनता दल-यूनाइटेड और तृणमूल कांग्रेस ने अजीबो-गरीब सफाई दी है। दोनों पार्टियों की दलील है कि कोलकाता एवं पटना स्थित उनके पार्टी कार्यालय में कोई अनजाना व्यक्ति बंद लिफाफे में चुनावी बॉन्ड देकर चला गया। इसलिए चुनावी चंदा देने वालों के बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, जेडीयू ने अप्रैल 2019 में मिले में 13 करोड़ रुपए के चुनावी चंदे में से तीन करोड़ का चंदा देने वाले डोनर्स की पहचान उजागर की है। 16 जुलाई 2018 और 22 मई 2019 के बीच टीएमसी को करीब इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 75 करोड़ रुपए का चुनावी चंदा मिला लेकिन पार्टी ने इन डोनर्स की पहचान का खुलासा नहीं किया है।

डोनर की पहचान उसके पास नहीं-टीएमसी

रिपोर्टों के मुताबिक 27 मई 2019 को चुनाव आयोग को दी गई अपनी जानकारी में टीएमसी ने कहा, 'चुनावी बॉन्ड के जरिए जो चंदा मिला, उनमें से ज्यादातर बॉन्ड को हमारे पार्टी कार्यालय भेजा गया या कार्यालय के बाहर लगे ड्राप बॉक्स में किसी ने छोड़ दिया। कुछ लोगों ने अलग-अलग व्यक्तियों के जरिए चुनावी बॉन्ड कार्यालय भिजवा दिया। चुनावी चंदा देने वाले ज्यादातर लोग अपनी पहचान गोपनीय रखना चाहते थे। इसलिए चुनावी बॉन्ड खरीदने वाले और पार्टी को चंदा देने वालों के ब्योरे और उनके नाम उसके पास नहीं हैं।'

कोई पार्टी कार्यालय आया, सीलबंद लिफाफा दे गया-जेडीयू

इसी तरह की दलील जेडीयू ने भी दी है। जेडीयू ने कहा कि तीन अप्रैल 2019 को कोई व्यक्ति हमारे पार्टी कार्यालय आया और एक बंद लिफाफा सौंप गया। इस बंद लिफाफे को जब खोला गया तो उसमें एक-एक करोड़ रुपए के 10 इलेक्टोरल बॉन्ड मिले। इसे देखते हुए चुनावी बॉन्ड के जरिए चंदा देने वालों के बारे में हम किसी तरह की जानकारी देने की स्थिति में नहीं हैं। पार्टी ने कहा कि इसके बाद हमने यह जानने की कोशिश भी नहीं कि चंदा किसने दिया क्योंकि उस समय इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट को कोई आदेश नहीं था। चुनावी बॉन्ड पर उस समय केवल भारत सरकार की अधिसूचना ही सामने थी।

जद-यू ने चंदा देने वाले दो नाम बताए

हालांकि, जेडीयू ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा देने वाले दो डोनरों श्री सिमेंट लिमिटेड, अजमेर राजस्थान और भारती एयरटेल लिमिटेड, गुड़गांव की पहचान उजागर की है। 16 अप्रैल 2019 को श्री सिमेंट ने दो करोड़ रुपए और 26 अप्रैल 2019 को भारती एयरटेल ने एक करोड़ रुपए का चुनावी चंदा दिया। टीएमसी ने अपने किसी डोनर की पहचान उजागर नहीं की है लेकिन पार्टी का कहा है कि भारतीय स्टेट बैंक से जारी होने वाले बॉन्ड के यूनिक नंबर से दान दाताओं की पहचान का खुलासा हो सकता है।

चुनावी बॉण्ड पर ईसी ने नया डाटा जारी किया

बता दें कि चुनावी बॉण्ड को लेकर चुनाव आयोग ने नया डाटा रविवार को सार्वजनिक किया। यह डाटा आयोग ने सीलबंद लिफाफे में उच्चतम न्यायालय को सौंपा था। न्यायालय ने बाद में आयोग से यह डेटा सार्वजनिक करने के लिए कहा था। माना जा रहा है कि ये विवरण 12 अप्रैल, 2019 से पहले की अवधि से संबंधित हैं। आयोग ने पिछले सप्ताह उपरोक्त तारीख के बाद के चुनावी बॉण्ड से संबंधित विवरण को सार्वजनिक किया था। आयोग ने एक बयान में कहा कि राजनीतिक दलों ने उच्चतम न्यायालय के 12 अप्रैल, 2019 के अंतरिम आदेश के अनुसार सीलबंद लिफाफे में चुनावी बॉण्ड से संबंधित डेटा दाखिल किया था।

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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