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एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को दे दी खुली चेतावनी, कहा- ...वरना 20 में से केवल दो विधायक बचेंगे

Eknath Shinde Slams Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे आमने सामने हैं। सूबे के डिप्टी सीएम शिंदे ने चेतावनी देते हुए ये कहा है कि हमारी आलोचना बंद करे शिवसेना (यूटीबी), वरना 20 में से केवल दो विधायक बचेंगे। आपको सारा विवाद समझाते हैं।

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उद्धव ठाकरे पर बरसे एकनाथ शिंदे।

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ शिवसेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने बृहस्पतिवार को शिवसेना (यूटीबी) को चेतावनी दी कि अगर उसने उनकी पार्टी और महायुति की आलोचना बंद नहीं की तो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के पास मौजूदा 20 में से केवल दो विधायक ही बचेंगे।

उद्धव ठाकरे की शिवसेना पर बरसे एकनाथ शिंदे

शिंदे ने कहा कि राज्य की जनता ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूटीबी) को करारा जवाब दिया और अब समय आ गया है कि वह आत्ममंथन करे। शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की जयंती पर उन्हें और अपने गुरु आनंद दिघे को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां ‘आनंद आश्रम’ के दौरे से इतर पत्रकारों से बातचीत में शिंदे ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में भी शिवसेना की मांग बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, 'पहले दिन से ही विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए), खासकर शिवसेना (यूटीबी) मेरी और महायुति की आलोचना कर रही है, लेकिन कुछ भी काम नहीं आया और राज्य के नागरिकों ने उन्हें करारा जवाब दिया तथा उन्हें उनकी जगह दिखा दी। अगर ऐसा ही रहा तो वे 20 में से 0 (शून्य) खो देंगे।'

कांग्रेस और शिवसेना (यूटीबी) में विभाजन का दावा

कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना के नेता राहुल शेवाले ने दावा किया था कि राज्य में विपक्षी कांग्रेस और शिवसेना (यूटीबी) के 10 से 15 विधायक पाला बदल कर 23 जनवरी को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल होंगे। मुंबई से लोकसभा के पूर्व सदस्य शेवाले ने यहां संवाददाता सम्मेलन में 23 जनवरी को शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की जयंती पर महाराष्ट्र में 'बड़े राजनीतिक भूकंप' की भविष्यवाणी की थी। शेवाले ने कहा था, '23 जनवरी को एक बड़े राजनीतिक भूचाल की संभावना है, जहां कांग्रेस और शिवसेना (यूटीबी) के 10 से 15 विधायक शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो जाएंगे।'

असंतोष के बारे में झूठी खबरें फैलाने का लगाया था आरोप

शिवसेना नेता ने कहा था कि ' यह उनकी पार्टी है जो विभाजित होने जा रही है, लेकिन विजय वडेट्टीवार (कांग्रेस) और संजय राउत (शिवसेना-यूटीबी) जैसे नेता शिवसेना में असंतोष के बारे में झूठी खबरें फैला रहे हैं।' वह दिन में वडेट्टीवार और राउत द्वारा अलग-अलग की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

शिवसेना (यूटीबी), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) के घटक हैं। शिवसेना (यूटीबी), कांग्रेस और राकांपा (एसपी) ने पिछले साल संपन्न हुए राज्य विधानसभा में क्रमश: 20, 16 और 10 विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। महाराष्ट्र कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति पर शिंदे की नाखुशी की अटकलों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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