देश में चुनाव प्रक्रिया को और मजबूत बनाने तथा केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से भारत निर्वाचन आयोग 24 फरवरी 2026 को राज्यों के चुनाव आयुक्तों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा। यह सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा और इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन करीब 25 साल बाद हो रहा है, इससे पहले ऐसा आयोजन 1999 में किया गया था। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, कई राज्यों के चुनाव आयुक्तों ने हाल के महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर चुनाव प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर साझा चर्चा और बेहतर तालमेल की जरूरत जताई थी। इन्हीं सुझावों के बाद इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करने का फैसला लिया गया।
CEC ज्ञानेश कुमार करेंगे सम्मेलन की अध्यक्षता
इस सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे। उनके साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उद्घाटन सत्र में मौजूद रहेंगे और राज्य निर्वाचन आयुक्तों को संबोधित करेंगे। आयोग का कहना है कि यह मंच केंद्र और राज्यों के चुनाव निकायों को एक साथ लाकर व्यावहारिक समस्याओं, कानूनी चुनौतियों और तकनीकी समाधान पर खुलकर चर्चा करने का अवसर देगा।
राज्यों के चुनाव आयुक्तों के साथ विशेषज्ञ भी होंगे शामिल
सम्मेलन में राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने साथ कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों को भी लाएंगे। इसके अलावा, भारत निर्वाचन आयोग के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे। आयोग का कहना है कि इससे चुनावी व्यवस्था को लेकर जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने और समाधान निकालने में मदद मिलेगी।
चुनावी कानून और मतदाता पात्रता पर होगी चर्चा
सम्मेलन के दौरान चुनाव कानूनों, मतदाता पात्रता, नामांकन प्रक्रिया, मतदान व्यवस्था और मतदाता सूची के प्रबंधन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। आयोग के अनुसार, राज्यों में स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़े नियम अलग अलग हैं, ऐसे में इन विषयों पर साझा समझ विकसित करना जरूरी है ताकि चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।
नई तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फोकस
सम्मेलन में तकनीकी पहलुओं पर भी खास जोर दिया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में शुरू किए गए ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म, ईवीएम प्रबंधन, मतदाता डाटाबेस और अन्य डिजिटल साधनों पर चर्चा होगी। आयोग का मानना है कि तकनीक का सही इस्तेमाल चुनाव प्रक्रिया को अधिक तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बना सकता है।
राज्य चुनाव आयोगों की भूमिका और संवैधानिक जिम्मेदारी
राज्य चुनाव आयोग 73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत बनाए गए हैं और उन्हें पंचायतों तथा नगर निकायों के चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। सम्मेलन में इस संवैधानिक भूमिका को और प्रभावी बनाने, संसाधनों की कमी, प्रशासनिक सहयोग और कानूनी चुनौतियों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
राज्यों ने बेहतर तालमेल की जरूरत जताई
सूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में कई राज्य निर्वाचन आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर बताया था कि केंद्र और राज्यों के चुनाव निकायों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय से चुनावी प्रक्रियाएं अधिक मजबूत हो सकती हैं। राज्यों का कहना था कि कई बार कानून, तकनीक और प्रशासनिक स्तर पर अलग अलग चुनौतियां सामने आती हैं, जिनका समाधान साझा मंच पर चर्चा से बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
ECI बोले, साझा अनुभवों से मजबूत होगी चुनाव प्रणाली
निर्वाचन आयोग का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग के पास लोकसभा और विधानसभा चुनावों के संचालन का लंबा अनुभव है, जबकि राज्य चुनाव आयोग पंचायत और नगर निकाय चुनावों का संचालन करते हैं। दोनों संस्थाओं के अनुभव साझा होने से देश की पूरी चुनाव प्रणाली को मजबूती मिलेगी और मतदाताओं का भरोसा और बढ़ेगा।
