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आपसी मतभेद की रिपोर्ट पर EC के सूत्रों ने दी सफाई, कहा- SIR समेत सभी फैसले सहमति से लिए गए

चुनाव आयोग के सूत्रों ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है। सूत्रों ने कहा कि एसआईआर सहित सभी फैसले बहुमत से लिए गए। तीन चुनाव आयुक्तों में से यदि दो सदस्य सहमत होते हैं, तो उसे बहुमत का फैसला माना जाता है।

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चुनाव आयोग के कामकाज पर विपक्ष ने जताई चिंता।

SIR News: इस रिपोर्ट के बाद कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने 14 बार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विभिन्न पहलुओं पर आपत्तियां जताई थीं, विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है। इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग के कामकाज पर चिंता जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस रिपोर्ट को अपने संज्ञान में लेने की अपील की है। वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है। सूत्रों ने कहा कि एसआईआर सहित सभी फैसले बहुमत से लिए गए। तीन चुनाव आयुक्तों में से यदि दो सदस्य सहमत होते हैं, तो उसे बहुमत का फैसला माना जाता है। सूत्रों का कहना है कि ईसीआई में बहुमत से फैसले लेने का प्रावधान है। खासतौर पर SIR पर कोई विवाद नहीं रहा। SIR सहित सभी फैसले सहमति से लिए गए।

बता दें कि SIR पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। वहीं, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली है। इस रिपोर्ट को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है। उसकी तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।

राउत ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की

शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त को ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की है। राउत ने कहा कि 'इस देश में चुनाव मजाक बन गए हैं। ECI गृह मंत्रालय के अधीन आता है। अगर प्रधानमंत्री देश को बचाना चाहते हैं, तो उन्हें अमित शाह को कैबिनेट से हटा देना चाहिए। अगर पीएम मोदी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो मैं राष्ट्रपति से ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपील करूंगा। अगर राष्ट्रपति भी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो सेना प्रमुख को ऐसे 'हुक्मशाहों' से देश को बचाने के लिए आगे आना चाहिए।'

कांग्रेस नेता उदित राज ने बोला हमला

कांग्रेस नेता उदित राज ने 'इस बात को जानकर खुशी हुई कि दो चुनाव आयुक्तों में अभी भी कुछ हिम्मत और मर्यादा बची है। 2003 का मैपिंग सिस्टम बहुत नुकसान पहुंचा रहा है... BJP-RSS की मशीनरी, चुनाव आयोग के साथ मिलकर इस पर काम कर रही है। ज्ञानेश कुमार इसके मुख्य व्यक्ति हैं। विपक्ष के सबसे ज़्यादा वोट काटे गए हैं; दलितों और मुसलमानों के वोट। मैं बचपन से दिल्ली में रह रहा हूं, कई बार वोट दिया है, फिर भी मेरे नाम में गड़बड़ी है। ऐसे लाखों लोग हैं जिनकी कोई आवाज नहीं है और उनके नाम काट दिए जाते हैं।'

तिवारी ने पूछा-विश्वसनीयता को कैसे बहाल किया जाएगा?

इसी रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने एक्स पर कहा- अगर इस रिपोर्ट में बताए गए स्पष्ट तथ्य सही हैं, तो ऐसा लगता है कि @ECISVEEP के संचालन में किसी अदृश्य शक्ति का हाथ है। अगर नियमों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया और सर्वसम्मति या बहुमत के बिना निर्णय लिए गए, तो @ECISVEEP के सभी निर्णय स्वतः ही मनमाने और अनुचित हैं। यह महाभियोग की कार्यवाही पर गंभीरता से विचार करने का एक उपयुक्त मामला हो सकता है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण मूल प्रश्न यह है कि @ECISVEEP की विश्वसनीयता को कैसे बहाल किया जाएगा।

अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल

उधर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसे लेकर चुनाव आयोग को घेरा है। अखिलेश ने एक्स पर लिखा- ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले!

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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