Sonia Gandhi Book Controversy: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने किताब में आपातकाल के दौर और गांधी परिवार की भूमिका से जुड़े खुलासों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या आपातकाल के लिए संजय गांधी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि राजीव गांधी को इसके विरोध में खड़ा किया जा रहा है?
निशिकांत दुबे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सोनिया गांधी की किताब से पता चलता है कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे ही शासन चला रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि जब राजीव गांधी और संजय गांधी अब जीवित नहीं हैं, तो इन बातों का जवाब कौन देगा? बीजेपी सांसद ने तंज कसते हुए लिखा, “संजय गांधी जी आपातकाल के विलेन और राजीव जी देवता?”
सोनिया गांधी ने किताब में आपातकाल को बताया बड़ी गलती
सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ (Belonging: A Journey of Love) 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। इसके प्रकाशित होने से पहले उन्होंने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में किताब से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर बात की है। इसमें उन्होंने आपातकाल के फैसले को गलती बताया और कहा कि अगर संजय गांधी को नियंत्रण में रखा गया होता, तो उस दौरान हुए काफी नुकसान को रोका जा सकता था।
सोनिया गांधी के मुताबिक, इंदिरा गांधी मूल रूप से लोकतांत्रिक विचारों वाली थीं और आपातकाल के दौरान सहज नहीं थीं। उन्होंने यह भी बताया कि आपातकाल लागू करने के फैसले को लेकर परिवार में मतभेद थे। उनके अनुसार, राजीव गांधी इस फैसले के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इंदिरा गांधी को अगले चुनाव तक इंतजार करने की सलाह दी थी।
संजय गांधी के फैसले पर क्या लिखा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनिया गांधी ने किताब में परिवार के साथ हुई एक डिनर बातचीत का जिक्र किया है। उनके अनुसार, उस दौरान संजय गांधी ने तर्क दिया था कि विपक्ष इंदिरा गांधी को राजनीतिक रूप से खत्म कर देगा और उन्हें रोकना जरूरी है। सोनिया के मुताबिक, संजय गांधी आपातकाल लागू करने के फैसले पर जोर दे रहे थे, जबकि राजीव गांधी इसके खिलाफ थे।
सोनिया गांधी ने यह भी लिखा है कि अगर संजय गांधी को नियंत्रण में रखा गया होता, तो आपातकाल के बाद हुए कई नुकसान को रोका जा सकता था। गौरतलब है कि देश में 1975 से 1977 तक आपातकाल लागू रहा था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं।
निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी की भूमिका पर उठाए सवाल
सोनिया गांधी के इन बयानों को लेकर निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी के शासन और उनके बेटों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उनकी पोस्ट का निशाना यह है कि अगर आपातकाल के फैसले में संजय गांधी की इतनी बड़ी भूमिका थी, तो उस समय प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए इंदिरा गांधी की जिम्मेदारी क्या थी?
दुबे ने यह भी सवाल उठाया कि संजय गांधी को आपातकाल का ‘विलेन’ और राजीव गांधी को उसका विरोध करने वाले के तौर पर पेश करने के पीछे क्या तर्क है। इस तरह सोनिया गांधी की किताब के कुछ अंश सामने आने के बाद आपातकाल के दौर और गांधी परिवार की भूमिका को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज होती दिख रही है।
