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मतदाता सूची से किया खिलवाड़ या नहीं माने निर्देश, तो BLO पर होगी कार्रवाई; ECI ने जारी की गाइडलाइन

चुनाव आयोग ने बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा मतदाता सूची में संभावित लापरवाही या अनुचित कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया तय की है। इसके तहत निलंबन से लेकर FIR दर्ज कराने तक की जिम्मेदारी और समयसीमा तय की गई है।

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चुनाव आयोग (फाइल फोटो)

बूथ स्तर अधिकारियों (BLOs) द्वारा मतदाता सूची की सत्यता और विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले जानबूझकर किए गए कृत्यों के मद्देनजर, चुनाव आयोग ने शुक्रवार को दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया स्पष्ट की। बूथ लेवल ऑफिसर चुनाव व्यवस्था के जमीनी स्तर के अधिकारी होते हैं, जो प्रत्येक बूथ पर मतदाता सूची का रखरखाव और अद्यतन करते हैं। प्रत्येक बूथ में औसतन 970 मतदाता या लगभग 300 घर होते हैं।

किन मामलों पर दिया गया ध्यान?

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र में आयोग ने कहा कि इसमें उन मामलों पर ध्यान दिया गया है जिनमें अधिकारियों की ड्यूटी में लापरवाही, कर्तव्य न निभाना, दुर्व्यवहार, चुनाव आयोग के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना, चुनाव कानूनों या नियमों का उल्लंघन, या कार्य/अकार्य से मतदाता सूची की विश्वसनीयता या सटीकता पर प्रतिकूल असर पड़ा हो। प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए आयोग ने कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) दोषी BLO को निलंबित करेंगे और संबंधित अनुशासनात्मक प्राधिकारी को विभागीय कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश करेंगे। यह सिफारिश अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा तत्परता से कार्यवाही करने के लिए की जाएगी और छह महीने के भीतर कार्रवाई की जानकारी प्रदान की जाएगी।

तुरंत करा सकते हैं FIR दर्ज

अगर किसी BLO ने आपराधिक कृत्य किया है, तो DEO मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की स्वीकृति से तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा सकते हैं, जैसा कि RP अधिनियम, 1950 की धारा 32 में निर्दिष्ट है। किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के CEO को यह अधिकार भी होगा कि वे BLO के खिलाफ स्वयं या DEO से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करें। CEO द्वारा लिए गए निर्णय को संबंधित DEO के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा। ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्यवाही का निष्कर्ष CEO की पूर्व सहमति के बिना प्रभावित नहीं होगा। आयोग ने यह भी जोर दिया कि कार्रवाई की जानकारी चुनाव आयोग को भी भेजी जाएगी।

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान कानून-व्यवस्था के लिए निर्देश

इसी दौरान, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने सभी जिला मजिस्ट्रेट (DM) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को कड़े निर्देश दिए हैं। यह कदम भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के नोटिस और सर्वोच्च न्यायालय के 19 जनवरी 2026 को डब्ल्यूपी (सी) संख्या 1089/2025 में जारी आदेश के अनुपालन (Compliance) में उठाया गया है।

इस मामले में अदालत ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से संबंधित कई याचिकाओं की सुनवाई की थी, जिनमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं ने प्रक्रिया में अनियमितताओं और लाखों मतदाताओं को परेशानी के आरोप लगाए थे। SIR के दौरान लगभग 1.36 करोड़ मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ (तार्किक विसंगति) के आधार पर नोटिस जारी किए गए, जिससे व्यापक असुविधा हुई। अदालत ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिनमें फ्लैग किए गए नामों का सार्वजनिक प्रदर्शन, दस्तावेज जमा करने की सुविधा और सुनवाई में प्रतिनिधि की अनुमति शामिल है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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