Amit Shah : दिल्ली में BIMSTEC गृह मंत्रियों की पहली बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि युवाओं को नशे और ड्रग्स से बचाना होगा क्योंकि आने वाली पीढ़ी के सामने नशा बहुत बड़ा खतरा है। शाह ने कहा कि ड्रग्स की तस्करी आतंकी गतिविधियों को बढ़ाती है और इसके खिलाफ भारत की जारी टॉलरेंस की नीति है। शाह ने कहा कि गृह मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करना भारत के लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। BIMSTEC क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’की भावना रखता है भारत-शाह
शाह ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ भारत आज आगे बढ़ रहा है। हम हमेशा शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध रहे हैं और आज भी हमारी प्रतिबद्धता कायम है। उन्होंने कहा कि 'भारत ने कभी किसी देश पर हमला करने या उस पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में विश्वास नहीं किया है। भारत हमेशा से हर देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने तथा मतभेदों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने में विश्वास करता रहा है।'
आतंक-तस्करी के खिलाफ सहयोग जरूरी-शाह
अमित शाह ने कहा, 'भारत वैश्विक आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और मादक पदार्थों की अवैध तस्करी से निपटने के लिए BIMSTEC कन्वेंशन में सहयोग और उसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। आपराधिक नेटवर्क सीमाओं के पार काम करते हैं और स्थानीय कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। इसलिए, क्षेत्रीय सहयोग हमारी कार्यप्रणाली में विशेष महत्व रखता है। इन नेटवर्कों के काम करने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं।'
'समावेशी विकास का एक मॉडल भी है BIMSTEC'
शाह ने कहा, '4 अप्रैल 2025 को छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि BIMSTEC हमारे लिए केवल एक क्षेत्रीय मंच नहीं है, बल्कि समावेशी विकास और सुरक्षा का एक मॉडल भी है। इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, आज गृह मंत्रियों के रूप में हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने सहयोग को एक व्यावहारिक व्यवस्था में बदलें, ताकि हमारे नागरिकों की सुरक्षा मजबूत हो और हमारी सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता में वृद्धि हो।'
बिम्सटेक में शामिल हैं 7 देश
बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमा, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। इसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी से लगे देशों और उसके पड़ोसी क्षेत्रों के बीच आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है।
