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नहीं थम रहा LG और केजरीवाल के बीच विवाद, सुप्रीम फैसले के एक दिन बाद ही फिर कोर्ट पहुंची 'AAP' सरकार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 12, 2023, 01:11 PM IST

Delhi vs Centre: एक बार फिर दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केजरीवाल सरकार ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी उपराज्यपाल अधिकारियों का ट्रांसफर नहीं करने दे रहे हैं। इस मामले में दिल्ली सरकार ने तुरंत सुनवाई की मांग की है।

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अरविंद केजरीवाल

Photo : BCCL

Delhi vs Centre: दिल्ली के IAS अधिकारियों पर नियंत्रण संबंधी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि दिल्ली के अधिकारियों पर पूरा नियंत्रण चुनी हुई सरकार का होगा। अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस, पब्लिक ऑर्डर और भूमि से जुड़े मामलों के अलावा अन्य मामलों पर दिल्ली सरकार निर्णय ले सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि दिल्ली के एलजी को एक चुनी हुई सरकार की सलाह को मानना होगा।

हालांकि, इस फैसले के अगले ही दिन यानी शुक्रवार को एक बार फिर दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केजरीवाल सरकार ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी उपराज्यपाल अधिकारियों का ट्रांसफर नहीं करने दे रहे हैं। इस मामले में दिल्ली सरकार ने तुरंत सुनवाई की मांग की है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट मामले में अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है।

सुप्रीम निर्णय के बाद एक्शन में आई थी आप सरकार

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार एक्शन में आ गई और उसने अपने मनपसंद अधिकारियों को ट्रांसफर पोस्टिंग शुरू कर दी। इस बीच केजरीवाल सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भ्ज्ञी अपने विभाग के सचिव आशीष मोरे को पद से हटा कर उनकी जगह अनिल कुमार सिंह को नया सचिव नियुक्त किया।

ट्रांसफर के बाद ही शुरू हुआ विवाद

आशीष मोरे के ट्रांसफर के बाद ही दिल्ली की आप सरकार और एलजी सचिवायल आमने-सामने आ गए। दिल्ली एलजी दफ्तर ने मोरे के ट्रांसफर को अवैध बताया। सूत्रों के मुताबिक, एलजी दफ्तर ने कहा कि मोरे के ट्रांसफर को लेकर उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सूत्रों का कहना है कि एक अधिकारी का तबादला कार्यकाल पूरा होने से पहले केवल सिविल सेवा बोर्ड में किया जा सकता है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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