Tahir Hussain: साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला आ गया है। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने पूर्व आप (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन उसके अन्य 4 सह-दोषियों इस मामले में उम्रकैद की सजा दी है। इसके अलावा, पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इससे पहले 13 जुलाई को अदालत ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को IPC की धारा 302 (हत्या), 365 (अपहरण), 147 (दंगा) और 153A (साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाना) के तहत दोषी ठहराया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि दोषियों में सुधार की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' श्रेणी में मानने से इनकार करते हुए मौत की सजा देने की मांग स्वीकार नहीं की। फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुनवाई के समय ताहिर हुसैन और अन्य दोषी अदालत में मौजूद थे। कोर्ट रूम में बड़ी संख्या में वकील और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
अपराध को अंजाम देने का तरीका अत्यंत क्रूर- अदालत
सजा का एलान करते हुए अदालत ने कहा कि यह घटना समाज को झकजोर देने वाली थी। जिस तरह से यह पूरी घटना हुई उसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि अपराध को अंजाम देने का तरीका अत्यंत क्रूर था। हमला इतना भीषण और निर्मम था कि पीड़ित की मौत के बाद भी उसका शव दोषियों ने घसीटकर चांद बाग ले गए और उसे नाले में फेंक दिया।
पुलिस ने मांगी थी फांसी की सजा
सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने सभी पांच दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत से कहा कि अंकित शर्मा की हत्या बेहद नृशंस तरीके से की गई थी और दोषियों ने उनके प्रति कोई दया नहीं दिखाई। उन्होंने अदालत में कहा कि जो लोग आज दया की मांग कर रहे हैं, उन्होंने वारदात के समय कोई रहम नहीं दिखाया। घायल अंकित शर्मा को अस्पताल तक नहीं पहुंचाया गया और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इसलिए दोषियों को किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
फैसले के बाद क्या बोला ताहिर?
वहीं, अदालत के इस फैसले के बाद जब आरोपी ताहिर हुसैन को अदालत से ले जाया जा रहा था तब उसने प्रतिक्रिया दी। ताहिर ने कहा कि हम हाईकोर्ट जाएंगे। हमें वहां से न्याय मिलेगा।
मृतक के शरीर पर मिले थे 51 जख्म
इससे पहले, सजा पर बहस के दौरान विशेष सरकारी वकील ने अदालत के समक्ष बेहद कड़ी दलीलें रखीं। पुलिस ने इस हत्याकांड को एक पूर्व-नियोजित और ठंडे दिमाग से की गई जघन्य हत्या करार देते हुए कहा कि वारदात के समय आरोपी कसाई और आदमखोर जानवर की तरह व्यवहार कर रहे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से पुलिस ने बताया कि अंकित शर्मा के शरीर पर 51 जख्म मिले थे।16 से अधिक वार धारदार हथियारों से किए गए थे। पुलिस के अनुसार, हत्या करने के बाद अंकित शर्मा के शव को खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया था, जिसे 26 फरवरी 2020 की सुबह बरामद किया गया था।13 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने ठहराया था दोषी
इससे पहले 13 जुलाई को अदालत ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को IPC की धारा 302 (हत्या), 365 (अपहरण), 147 (दंगा) और 153A (साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाना) के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने माना था कि ताहिर हुसैन उस हथियारबंद उग्र भीड़ की अगुवाई कर रहा था, जिसने नफरत के भाव से अंकित शर्मा को घेरकर बेरहमी से मार डाला।
बचाव पक्ष का तर्क: 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' केस नहीं
दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकीलों ने फांसी की सजा का विरोध करते हुए कहा था कि 91 गवाहों की गवाही के बाद भी 11 में से 6 आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी में नहीं आता और अदालत को सुधार की गुंजाइश को देखते हुए फांसी की सजा से बचना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला 31 जुलाई के लिए सुरक्षित रख लिया था।
