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दिल्ली दंगे के इन 12 आरोपियों को अदालत से मिली राहत; हत्या और साजिश के आरोपों से किया बरी

दिल्ली दंगे से जुड़े मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। हत्या और साजिश के आरोपों से 12 लोगों को अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि कुछ आरोपी व्यक्ति ने अपनी चैट में हत्या की बात कबूल की थी। आपको इस रिपोर्ट में पूरा मामला बताते हैं।

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दिल्ली दंगे: अदालत ने हत्या और साजिश के आरोपों से 12 लोगों को बरी किया। (फाइल फोटो)

Delhi Riots: दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपी 12 लोगों को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी 26 फरवरी, 2020 को गोकलपुरी इलाके में हाशिम अली नामक व्यक्ति की हत्या करने वाली दंगाई भीड़ का हिस्सा थे।

आरोपियों को बरी करते हुए अदालत ने आदेश में क्या कुछ कहा?

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य भीड़ का हिस्सा होने के रूप में आरोपी की पहचान स्थापित करने के लिए अपर्याप्त थे। 30 अप्रैल को दिए गए अपने 52 पृष्ठ के आदेश में न्यायाधीश ने कहा, 'मुझे लगता है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य के नाम पर कुछ ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जो किसी भी आरोपी व्यक्ति को अपराधी भीड़ का सदस्य बताने के लिए अपर्याप्त हैं।'

दिल्ली दंगा मामले में किन 12 आरोपियों को अदालत ने किया बरी?

इसके बाद अदालत ने लोकेश कुमार सोलंकी, पंकज शर्मा, अंकित चौधरी, प्रिंस, जतिन शर्मा, हिमांशु ठाकुर, विवेक पांचाल, ऋषभ चौधरी, सुमित चौधरी, टिंकू अरोड़ा, संदीप और साहिल को बरी कर दिया। इसमें कहा गया कि अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर भरोसा किया था क्योंकि प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपी की पहचान करने के लिए उसके मामले का समर्थन नहीं किया था।

अपराध साबित करने के लिए ठोस सबूत नहीं होने के चलते सुनाया फैसला

अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि कुछ आरोपी व्यक्ति (जो 'कट्टर हिंदू एकता' नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे) ने अपनी चैट में हत्या की बात कबूल की थी। इसमें कहा गया है कि ऐसी पोस्ट या संदेश केवल ग्रुप के अन्य सदस्यों की नजर में हीरो बनने के इरादे से ग्रुप में डाले जा सकते हैं। इसमें कहा गया है कि इन पोस्ट को हत्या को साबित करने के लिए ठोस सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है जिसमें दंगा, हत्या और आपराधिक साजिश शामिल है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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