दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को मुख्य न्यायिक परिषद (CJP) के मुख्य प्रवक्ता के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि सुरक्षाकर्मियों ने चलो संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने इस दावे को पूरी तरह से झूठा और भ्रामक बताया। सीजेपी के सौरभ दास ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन से फायरिंग की। पोस्ट में एक वीडियो भी था जिसमें एक व्यक्ति अस्पताल में घायल पड़ा था और उसने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उसे पेलेट गन से चोटें आई थीं।
फर्जी खबर की चेतावनी जारी
इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए, दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर फर्जी खबर चेतावनी जारी कर इस दावे का खंडन किया। पुलिस ने कहा, पुलिस बलों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल की खबरें पूरी तरह से झूठी और भ्रामक हैं। पुलिस ने लोगों से अपुष्ट सामग्री साझा न करने और न फैलाने का आग्रह किया और जनता को सलाह दी कि सोशल मीडिया पर जानकारी पोस्ट करने या आगे भेजने से पहले केवल आधिकारिक स्रोतों से ही तथ्यों की पुष्टि करें।
दिल्ली पुलिस की पोस्ट में लिखा था, अफवाहें या गलत सूचना फैलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। "चलो संसद" विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा संसद की ओर मार्च करने के प्रयास में नई दिल्ली जिले में हुई झड़पों में कम से कम 60 प्रदर्शनकारी और 118 पुलिसकर्मी घायल हो गए।
नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन अब और उग्र हो गया है। आंदोलन के 32वें दिन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बातचीत के नाम पर सरकार ने सिर्फ उनका समय बर्बाद किया है। अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर समर्थकों को संबोधित करते हुए सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक के बारे में की दावे किए।
मोबाइल जब्त किए
दिपके का आरोप है कि बातचीत के लिए बुलाकर उनके प्रतिनिधियों के मोबाइल फोन छीन लिए गए। CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को एक तरह से जेपी नड्डा के आवास पर 'हाउस अरेस्ट' जैसी स्थिति में 5 घंटे तक बिठाकर रखा गया। दिपके ने कहा, पूरा प्लान टीम को बिखेरने का था, ताकि जब बाहर अराजकता (पुलिस कार्रवाई) हो, तो संभालने वाला कोई न हो। एक तरफ आप बातचीत का ढोंग करते हैं, दूसरी तरफ छात्रों पर लाठियां भांजते हैं।
जेपी नड्डा के साथ बैठक में क्या हुआ?
सोमवार को आंदोलनकारियों के 'संसद चलो' मार्च को रोकने के बाद सरकार और CJP के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी। CJP के प्रतिनिधियों ने जेपी नड्डा को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग सबसे प्रमुख है। जेपी नड्डा ने आश्वासन दिया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व के साथ आंतरिक चर्चा करेंगे। हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अनशन तोड़ने वाले थे वांगचुक
इस आंदोलन का एक और सबसे चिंताजनक पहलू पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन है, जो 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। उन्हें 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था और तब से उनका अनशन जारी है। दिपके ने कहा, सोनम वांगचुक कल अपना अनशन समाप्त करने वाले थे। हमने बड़ी मुश्किल से उन्हें समझाया था। हमने उनसे आग्रह किया कि उनका जीवन इस देश के लिए बहुत कीमती है और उन्हें अपना अनशन समाप्त कर देना चाहिए। वे किसी तरह मान भी गए थे, लेकिन पुलिस की बर्बरता देखकर उन्होंने अपना अनशन जारी रखा है और यह बहुत गंभीर बात है।
सोनम वांगचुक के 'अंग हो सकते हैं डैमेज'
दिपके ने चेतावनी दी कि वांगचुक पिछले 4 दिनों से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों के मुताबिक अगले 3-4 दिनों में उनके अंग (Organs) डैमेज हो सकते हैं। दिपके ने कहा कि वांगचुक का लगातार अनशन गंभीर चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने आगे कहा, उनका शरीर 20-21 दिनों तक उपवास सहन कर सकता है। उसके बाद उनकी जान को खतरा है। डॉक्टरों ने कहा था कि तीन-चार दिनों में उनके अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्हें लाए हुए चार दिन हो चुके हैं। हम नहीं चाहते थे कि उनका उपवास लंबा चले।
