देश

अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, अभियान के दूसरे दिन जुटाए 32 लोगों के दस्तावेज

Delhi News: दिल्ली पुलिस ने अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ अभियान के तहत 32 लोगों के दस्तावेज एकत्र किये। अधिकारियों ने इस बात तो स्पष्ट कर दिया कि यहां अवैध रूप से रहने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आपको बताते हैं कि इस अभियान के तहत क्या कुछ किया जा रहा है।

Image

दिल्ली पुलिस

Campaign against illegal Bangladeshis: दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ अपने सत्यापन अभियान के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को 32 लोगों के दस्तावेज एकत्र किए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि ये लोग पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में रह रहे हैं।

दिल्ली के झुग्गियों में पुलिस ने चलाया अभियान

पुलिस उपायुक्त (शाहदरा) प्रशांत गौतम ने बताया, ‘‘राजधानी में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को न्यू सीमापुरी की ई-44 झुग्गियों में व्यापक अभियान चलाया।’’ उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान 32 व्यक्तियों के दस्तावेज सत्यापन के लिए एकत्र किए गए। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों को फर्जी पहचान पत्र का उपयोग नहीं करने को कहा गया तथा उन्हें आश्वासन दिया गया कि यह अभियान पूरी तरह से अनधिकृत घुसपैठियों की पहचान करने पर केंद्रित है।

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यहां अवैध रूप से रहने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी पुलिस उपायुक्त ने कहा, ‘‘यह अभियान शहर की सुरक्षा-व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, आने वाले हफ्तों में इस तरह की और पहल की योजना बनाई गई है।’’

अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई

दिल्ली के उपराज्यपाल सचिवालय ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय राजधानी में रह रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान करने तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए दो महीने का विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया था। एक अधिकारी ने बताया कि विभिन्न पुलिस थानों की टीम अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान के वास्ते मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड की जांच करने के लिए झुग्गी-झोपड़ियों और दिल्ली के कालिंदी कुंज, शाहीन बाग और जामिया नगर का निरीक्षण कर रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article