देश

क्या इंजीनियर रशीद को संसद सत्र में हिस्सा लेने की इजाजत मिलेगी? हाईकोर्ट ने NIA से मांगा जवाब

Delhi High Court on Rashid Engineer's plea: संसद सत्र में हिस्सा लेने के अनुरोध वाली इंजीनियर रशीद की याचिका पर अदालत ने एनआईए से जवाब मांगा है। जेल में बंद जम्मू कश्मीर के सांसद इंजीनियर रशीद आतंकवाद विरोधी कानून गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपों का सामना कर रहे हैं।

Image

इंजीनियर रशीद

New Delhi: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से जेल में बंद जम्मू कश्मीर के सांसद शेख अब्दुल रशीद उर्फ इंजीनियर रशीद की संसद के मौजूदा सत्र में भाग लेने की अनुमति के अनुरोध वाली याचिका पर अपना रुख बताने को कहा। रशीद आतंकवाद विरोधी कानून गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपों का सामना कर रहे हैं।

इंजीनियर रशीद की अपील पर कोर्ट ने एनआईए को जारी किया नोटिस

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने अधीनस्थ अदालत के उस आदेश के खिलाफ रशीद की अपील पर एनआईए को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें अभिरक्षा पैरोल या अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। पीठ ने मामले को 18 मार्च को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा, 'नोटिस जारी कर रहे हैं। अगर कोई आपत्ति हो तो उसे सोमवार को इस अदालत के समक्ष रखा जाए।'

अपनी याचिका में जम्मू कश्मीर के सांसद रशीद ने क्या कुछ कहा?

रशीद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि संसद का सत्र चार अप्रैल तक है और सांसद के निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, 'मैं उस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हूं, जहां जम्मू कश्मीर की पूरी आबादी का 45 प्रतिशत हिस्सा रहता है। मुझे अभिरक्षा (पैरोल) में (संसद) भेज दें।' उन्होंने कहा कि उन्हें पहले उच्च न्यायालय द्वारा दो दिनों के लिए अभिरक्षा पैरोल की राहत दी गई थी।

नियमित जमानत याचिका पर 19 मार्च को फैसला किए जाने की संभावना

एनआईए के वकील ने कहा कि रशीद की नियमित जमानत याचिका पर अधीनस्थ अदालत द्वारा 19 मार्च को फैसला किए जाने की संभावना है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हराने वाले बारामुला के सांसद रशीद पर आतंकी वित्त पोषण के मामले में मुकदमा चल रहा है। उन पर जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी समूहों को वित्तीय मदद देने का आरोप है।

अंतरिम राहत के तौर पर 10 फरवरी को उच्च न्यायालय ने रशीद को 11 और 13 फरवरी को संसद सत्र में भाग लेने के लिए दो दिन की अभिरक्षा में पैरोल की अनुमति दी थी। एनआईए द्वारा 2017 के आतंकी-वित्तपोषण के मामले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article