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उन्नाव रेप केस: पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने दी अंतरिम जमानत

Kuldeep Singh Sengar: उन्नाव रेप केस में आरोपी व बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनको मेडिकल ग्राउंड पर दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है।

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कुलदीप सिंह सेंगर को मिली अंतरिम जमानत।

Kuldeep Singh Sengar: उन्नाव रेप केस में बड़ा अपडेट सामने आया है। पूर्व विधायक व बीजेपी से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनको मेडिकल ग्राउंड पर दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंगर को एम्स नई दिल्ली में भर्ती कराया जाएगा। चिकित्सा अधीक्षक अदालत को सुझाव देंगे कि क्या उनका इलाज AIIMS में संभव है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि वह मधुमेह, मोतियाबिंद, रेटिना संबंधी समस्या और अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं।

बता दें, कुलदीप सिंह सेंगर ने बीमारियों का हलावा देते हुए जमानत याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अपनी बीमारियों को लेकर कोर्ट से अनुरोध किया था कि इलाज नहीं मिल पाने की वजह से उन्हें काफी परेशानी हो रही हैं। ऐसे में उन्हें अपने बीमारियों के इलाज के लिए जमनत दी जाये। अदालत ने उनके आवेदन को स्वीकार कर लिया है।

उम्र कैद की सजा काट रहे कुलदीप सिंह सेंगर

उन्नाव रेप केस में आरोपी बीजेपी से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 16 दिसंबर 2019 में अदालत ने दोषी ठहराया था। 20 दिसंबर, 2019 को दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई और साथ ही 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने यह सजा सेंगर को नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में सुनाई थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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