दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने कांग्रेस नेता अल्का लांबा को पुलिसकर्मियों पर हमले और सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध करने से जुड़े मामले में दोषी ठहरा दिया है। ये मामला 2024 में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान का है।
कांग्रेस नेता अलका लांबा पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की, काम में बाधा, कानूनी आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ता रोकने का आरोप है। अलका लांबा पर बीएनएस की धारा 132, 221, 223 (ए) और 285 के तहत केस चल रहा था, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए लांबा को दोषी करार दिया। अदालत अब मामले में सजा के मुद्दे पर 5 जून को बहस सुनेगी।
क्या है मामला
दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा का आदेश जारी करने के बावजूद अलका लांबा ने 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला कांग्रेस का महिला आरक्षण को लेकर प्रदर्शन किया था।
लांबा पर क्या आरोप
अलका लांबा पर आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ टालस्टाय मार्ग पर लगे बैरिकेड पर पहुंचीं और नारेबाजी की। लांबा संसद का घेराव करने पर आमादा थीं। मौके पर मौजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से निषेधाज्ञा के बारे में प्रदर्शनकारियों को जानकारी दी और प्रदर्शन खत्म करने की चेतावनी दी थी।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अलका लांबा और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर बैरिकेड को पार किया और संसद मार्ग जाम कर दिया। पुलिस के काफी समझाने के बाद भी अलका लांबा और दूसरे समर्थक वहां से नहीं हटे, जिसके बाद गिरफ्तार कर लिया था। बाद में सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह के बयान पर अलका लांबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 20 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने संबंधित घटना का वीडियो देखा था, जिसमें पाया गया कि अलका बलपूर्वक लोकसेवक को उसके काम में बाधा पहुंचा रही थीं।
