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टैंक बेड़े का आधुनिकीकरण करेगी भारतीय सेना, रक्षा मंत्रालय ने 10 खरीद प्रस्तावों को दी मंजूरी

Defence Ministry: रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस मंजूरी के बाद भविष्य के लिए तैयार लड़ाकू वाहनों (एफआरसीवी), एयर कंट्रोल फायर डिफेंस रडार, डोर्नियर-228 विमान, फास्ट पेट्रोलिंग नौकाओं और तट से दूर पेट्रोलिंग के लिए जहाजों की खरीद का रास्ता साफ हो गया है।

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रक्षा मंत्रालय।

Photo : BCCL

Defence Ministry: केंद्र सरकार ने स्थानीय रक्षा उत्‍पादन को बढ़ावा देते हुए मंगलवार को भारतीय सेना के टैंकों बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए 1,44,716 करोड़ रुपये के 10 खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने 1,44,716 करोड़ रुपये की राशि के 10 खरीद प्रस्तावों को स्वीकृति (एओएन) प्रदान की।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कुल लागत का 99 प्रतिशत हिस्सा खरीदें (भारतीय) और ‘खरीदें (भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन किये गये, विकसित और निर्मित) श्रेणियों के तहत स्वदेशी स्रोतों से है। इस कदम से भविष्य के लिए तैयार लड़ाकू वाहनों (एफआरसीवी), एयर कंट्रोल फायर डिफेंस रडार, डोर्नियर-228 विमान, फास्ट पेट्रोलिंग नौकाओं और तट से दूर पेट्रोलिंग के लिए जहाजों की खरीद का रास्ता साफ हो गया है।

एफआरसीवी होगी भविष्य का युद्धक टैंक

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि एफआरसीवी भविष्य का एक मुख्य युद्धक टैंक होगा। इसमें बेहतर गतिशीलता, हर तरह के इलाकों में काम करने की क्षमता, बहुस्तरीय सुरक्षा, सटीक और घातक फायर और वास्तविक समय की स्थिति के बारे में जानकारी होगी। इसके साथ ही सरकार ने एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार की खरीद के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जो हवाई लक्ष्यों का पता लगाएगा और उन्हें ट्रैक करेगा तथा फायरिंग समाधान प्रदान करेगा। मंत्रालय ने कहा, फॉरवर्ड रिपेयर टीम (ट्रैक्ड) के लिए भी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसमें मशीनीकृत ऑपरेशन के दौरान इन-सीटू मरम्मत करने के लिए उपयुक्त क्रॉस-कंट्री मोबिलिटी है। यह उपकरण आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है, और यह मशीनीकृत इन्फेंट्री बटालियन और आर्मर्ड रेजिमेंट दोनों के लिए अधिकृत है।

डोर्नियर-228 विमान बढ़ाएंगे क्षमता

साथ ही भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तीन एओएन दिए गए हैं। मंत्रालय ने बताया कि डोर्नियर-228 विमान, खराब मौसम की स्थिति में उच्च परिचालन विशेषताओं वाले अगली पीढ़ी के तेज गश्ती पोत, और उन्नत प्रौद्योगिकी तथा ज्यादा लंबी दूरी के संचालन के साथ अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत के आईसीजी में शामिल होने से निगरानी, समुद्री क्षेत्र की गश्त, खोज और बचाव तथा आपदा राहत कार्यों को करने की बल की क्षमता बढ़ेगी। रक्षा मंत्री ने आईसीजी के दिवंगत महानिदेशक राकेश पाल को भी सम्मानित किया, जो डीएसी के सदस्य भी थे। उनका 18 अगस्त को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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